आसींद । एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं दूसरी ओर आसींद क्षेत्र के धोली ग्राम में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्राम पंचायत मोतीपुर के धोली गांव में मुख्य सड़कों पर बहता गंदा पानी प्रशासन के दावों की पोल खोल रहा है। लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को गंदगी और बदबू के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मोतीपुर पंचायत के सरपंच और सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत नाली निर्माण और जल निकासी के लिए मिलने वाले फंड का सही उपयोग नहीं किया गया। सड़क पर जमा गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में मौसमी बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। शिकायत पर धोखाधड़ी, दूसरी पंचायत के दस्तावेज किए अपलोड। हैरानी की बात यह है कि जब ग्रामीणों ने परेशान होकर राज्य सरकार के संपर्क पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, तो समाधान के नाम पर बड़ा खेल किया गया। पंचायत अधिकारियों ने मौके पर नाली निर्माण या सफाई करवाने के बजाय पोर्टल पर रिपोर्ट बंद करने के लिए दूसरी पंचायत के राशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों की कॉपियां लगाकर रिपोर्ट भेज दी। अधिकारियों की इस जालसाजी के सबूत वर्तमान में सरकारी पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन और पंचायत अधिकारियों की इस मनमर्जी और भ्रष्टाचार को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर अधिकारी अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। गंदे पानी से स्कूली बच्चों और बुजुर्गों का निकलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, पोर्टल पर फर्जी रिपोर्ट अपलोड करने वाले दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और जल्द से जल्द नाली निर्माण करवाकर जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
