वक्फ संपत्ति पर कथित कब्जे और धार्मिक सामग्री के अपमान का आरोप, आम मुस्लिम समाज ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

पुनित चपलोत
भीलवाड़ा // वक्फ संपत्ति “सुल्तान शाह की बावड़ी” से जुड़े विवाद को लेकर सोमवार को मुस्लिम समाज और मुस्लिम सद्भाव सेवा समिति ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हाफिजुर रहमान की सदारत में सौंपा गया, जिसमें शहर की विभिन्न मस्जिदों के इमामों सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि शाहपुरा स्थित वक्फ संपत्ति को लेकर माननीय न्यायालय ने 16 फरवरी 2026 को स्थायी निषेधाज्ञा जारी करते हुए संपत्ति के उपयोग, धार्मिक गतिविधियों और आवागमन में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद नगर पालिका द्वारा कथित रूप से वक्फ संपत्ति पर तारबंदी कर कब्जा कर लिया गया, जिससे न्यायालय के आदेश की अवहेलना हुई और धार्मिक गतिविधियों के साथ आमजन के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हुई।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि दरगाह और मजार से संबंधित धार्मिक सामग्री तथा पवित्र कुरआन शरीफ की आयतों वाली चादरों को डंपिंग यार्ड में फेंक दिया गया, जिससे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इस घटना को लेकर समाज में गहरा रोष व्याप्त है।

ज्ञापन में प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, न्यायालय के आदेश की अवहेलना तथा धार्मिक सामग्री के कथित अपमान के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय व कानूनी कार्रवाई करने तथा भविष्य में वक्फ संपत्तियों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।

इस दौरान मुस्लिम सद्भाव सेवा समिति के सदर शरीफ खान पठान, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता याकुब खान, हमीद रंगरेज, सलामुद्दीन पठान, सैयद शराफत अली, ताज मोहम्मद एडवोकेट सहित समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।