दक्ष हॉस्पिटल मामले में आया नया मोड़…. मामले में निष्पक्ष जांच एव कार्यवाही को लेकर सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर के नाम सोंपा ज्ञापन, जांच एव कार्यवाही की मांग

ओम जैन 

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|दक्ष हॉस्पिटल मामले में अब नया मोड़ आ गया है, पिछले दो दिनों से अखबारों की सुर्खियां बना यह मामला अब भी थमने का नाम नही ले रहा है, मामले को लेकर पीड़ित सोनु गिरी ने दक्ष हॉस्पिटल एवं डॉ. चिन्मय के विरुद्ध दुर्व्यवहार, जबरन आयुष्मान योजना में शामिल करने, बिल में अनियमितता एव जांच के सम्बंध में सीएमएचओ को मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री ओर जिला कलेक्टर के नाम शिकायत पत्र सौंपा।
सोनु द्वारा सौंपे शिकायत पत्र में उन्होंने बताया कि 23 फरवरी 2026 को मैं अपनी पत्नी को दक्ष हॉस्पिटल में उपचार हेतु लेकर गया था। परामर्श के दौरान डॉ. चिन्मय द्वारा मेरी पत्नी की जांच की गई और दो दिन के लिए भर्ती करने की सलाह दी गई।
भर्ती के समय अस्पताल स्टाफ एवं डॉक्टर द्वारा मुझे आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत भर्ती कराने के लिए लगातार दबाव डाला गया। मेरे स्पष्ट मना करने के बावजूद मुझे मानसिक रूप से मजबूर किया गया, जिसके कारण मुझे अनिच्छा से आयुष्मान योजना के अंतर्गत भर्ती कराना पड़ा।
भर्ती के दौरान केवल सामान्य उपचार एंटीबायोटिक, दर्द निवारक दवाइयाँ एवं ग्लूकोज़ ड्रिप दिया गया।
24 फरवरी को जब मैंने डिस्चार्ज की मांग की, तो मुझे बताया गया कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत कम से कम चार दिन भर्ती रहना अनिवार्य है। मैंने स्पष्ट कहा कि मैं योजना के अंतर्गत उपचार नहीं करवाना चाहता और नकद भुगतान करने के लिए तैयार हूँ। लगभग दोपहर 3 बजे नकद भुगतान की सहमति देने के बावजूद 3-4 घंटे तक बिना कारण जानबूझकर डिस्चार्ज नहीं दिया गया।
पूरे घटनाक्रम के दौरान डॉक्टर एवं स्टाफ का बात करने का तरीका अत्यंत अनुचित, असम्मानजनक एवं अपमानजनक था। उन्होंने ऊँची आवाज में बात की, अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा मुझे और मेरे साथ आए लोगों को डराने एवं दबाव बनाने का प्रयास किया।

बिलिंग प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं

सोनु ने अपने शिकायत पत्र में बताया कि मेरे द्वारा बिल मांगा गया जिसमें पहले तो टालमटोल किया गया लेकिन बाद में मुझे 4 बार अलग अलग बिल दिए गए जिसमे पहला बिल 12,000 का दिया, मेने ओपजेक्शन किया तो बाद में कहा गया कि यह किसी अन्य मरीज का है, जबकि उस बिल पर मेरी पत्नी का ही नाम था। दूसरी बार मे मुझे 1,500 का बिल लाकर दिया।
तीसरा बिल मुझे 2086 रुपये का दवा का लाकर दिया, बार बार बिल बदलने पर मैने जब सवाल किया और सही बिल देने को बात पर अड़ गया तो अंत में विवाद के बाद मुझे 4000 रुपये का बिल दिया गया।
मेरे बार बार मांगने के बावजूद मुझे उचित एवं विस्तृत बिल उपलब्ध नहीं कराया गया। यह कहा गया कि आयुष्मान योजना में बिल नहीं दिया जाता, जो कि अत्यंत संदिग्ध है।

पेशेवर योग्यता एवं आचरण पर भी संदेह, शैक्षणिक योग्यता एवं रजिस्ट्रेशन की हो जांच

सोनु गिरी ने शिकायत पत्र सौंप मांग की है कि डॉक्टर द्वारा जिस प्रकार का व्यवहार और बातचीत की गई, उससे मुझे उनकी पेशेवर योग्यता एवं आचरण पर भी संदेह उत्पन्न हुआ है। अतः आपसे निवेदन है कि संबंधित डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता एवं पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) की भी जांच करवाई जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे विधिवत पात्र एवं अधिकृत चिकित्सक हैं।

आयुष्मान योजना में गड़बड़झाला, उचित जांच हो

साथ ही उन्होंने बताया कि मुझे संदेह है कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है। अतः डॉक्टर एवं स्टाफ के दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच की जाए, संबंधित डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता एवं पंजीकरण की जांच करवाई जाए। आयुष्मान योजना के अंतर्गत किए गए बिलों की जांच की जाए। अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया की विस्तृत जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही मांग की कि मुझे उपचार का पूर्ण एवं विस्तृत बिल उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और प्रसासन से इस गंभीर मामले में शीघ्र एवं निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
मामले को लेकर सीएमएचओ तारा चंद गुप्ता ने कहा कि मुझे शिकायत पत्र मिला है, टीम गठित कर हॉस्पिटल भेजी है, मामले में जांच जारी है।