पुनित चपलोत
भीलवाड़ा // जिला कलेक्ट्रेट के बाहर बुधवार को निजी स्कूल संचालकों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। संचालकों ने आरटीई के लंबित भुगतान, निरीक्षण व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक प्रताड़ना बंद करने की मांग उठाई। इससे पहले जिलेभर के निजी स्कूलों ने अपनी मांगों के समर्थन में एक दिवसीय सांकेतिक बंद रखा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भीलवाड़ा जिला निजी स्कूल संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष पंकज प्रजापत ने बताया कि गैर-सरकारी (निजी) विद्यालयों के साथ की जा रही दमनकारी नीतियों, प्रशासनिक प्रताड़ना और राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत लंबित भुगतान के विरोध में जिले के सभी निजी स्कूल पूरी तरह बंद रहे। आंदोलन के तहत मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा गया।
उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग और राज्य सरकार गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रति अपना दमनकारी रवैया तुरंत बंद नहीं करती और लंबित समस्याओं का समाधान नहीं करती, तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में आ सकती है। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द निजी स्कूलों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
