नीरज मीणा
गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच एवं जनजागरूकता पर दिया गया विशेष जोर
स्मार्ट हलचल/मंडावर। उपखंड क्षेत्र के समीप ऊकरूंद गांव में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत गुरुवार को राजकीय विद्यालय ऊकरूद में चयनित आरोग्य सखी एवं आरोग्य मित्रों का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाना, स्वास्थ्य स्वयंसेवकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना तथा गांव स्तर पर बीमारियों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार मीना ने कहा कि किसी भी स्वस्थ समाज की नींव जागरूक नागरिक और सुदृढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था होती है। आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना इसी सोच के साथ संचालित की जा रही है, ताकि प्रत्येक गांव में ऐसे प्रशिक्षित स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैयार किए जा सकें जो आमजन तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच भी कर सकें।
उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान आरोग्य सखी एवं आरोग्य मित्रों को डिजिटल ब्लड प्रेशर मशीन से रक्तचाप मापने की वैज्ञानिक विधि, ग्लूकोमीटर द्वारा ब्लड शुगर की जांच, हीमोग्लोबिन मीटर से हीमोग्लोबिन स्तर की जांच, जांच उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, संक्रमण से बचाव के उपाय, स्वच्छता के मानकों, मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने तथा आवश्यक होने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. मीना ने कहा कि आज की बदलती जीवनशैली के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया और अन्य गैर-संचारी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि इनकी समय पर जांच हो जाए तो गंभीर बीमारियों और जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। ऐसे में प्रशिक्षित आरोग्य सखी एवं आरोग्य मित्र गांवों में नियमित स्वास्थ्य जांच कर लोगों को समय पर उपचार लेने के लिए प्रेरित करेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाएंगे, गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी में सहयोग करेंगे तथा लोगों को सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं, आयुष्मान भारत योजना और अन्य जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि स्वास्थ्य जांच उपकरणों के उपयोग का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। प्रत्येक प्रतिभागी ने स्वयं ब्लड प्रेशर मापना, ग्लूकोमीटर से शुगर जांचना तथा हीमोग्लोबिन मीटर का उपयोग करना सीखा। विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली सावधानियों के बारे में मार्गदर्शन दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) ममता मीना ने कहा कि आरोग्य सखी एवं आरोग्य मित्र स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण समुदाय के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करेंगे। इनके माध्यम से लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगी तथा गांवों में समय पर स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था मजबूत होगी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रामकेश मीना ने कहा कि विद्यालय परिसर में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होने से विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों में भी स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक जागरूकता का वातावरण बनता है। उन्होंने चिकित्सा विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ ग्राम ही विकसित समाज की पहचान है।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षित आरोग्य सखी एवं आरोग्य मित्रों से अपने-अपने क्षेत्र में नियमित रूप से स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने, लोगों को संतुलित आहार, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर चिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ममता मीना, विद्यालय के प्रधानाचार्य रामकेश मीना, विद्यालय स्टाफ तथा बड़ी संख्या में चयनित आरोग्य सखी एवं आरोग्य मित्र उपस्थित रहे।
