– मुकदमा नम्बर 311/2024 थाना कोतवाली टोंक की जांच में दोषी माने जाने के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल
शिवराज बारवाल मीना
टोंक।स्मार्ट हलचल|जिले में कस्टोडियन भूमि को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता और सरपंच हंसराज फागना सहित कुल 14 जनों पर इसरदा डैम के डूब क्षेत्र में आने वाली कस्टोडियन भूमि पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगा है।
मामले में शिकायतकर्ता रामधन चौधरी का आरोप है कि सितम्बर 2024 में दर्ज मुकदमा संख्या 311 / 2024 थाना कोतवाली टोंक में जांच के दौरान आरोपियों को दोषी माना गया, इसके बावजूद अब तक गिरफ्तारी या कठोर कार्रवाई नहीं की गई है।
*जिला कलेक्टर के निर्देश पर दर्ज हुआ था प्रकरण*
शिकायत के अनुसार, जिला कलेक्टर टोंक के निर्देश पर तत्कालीन तहसीलदार (उप पंजीयक) रामधन गुर्जर द्वारा 4 सितम्बर 2024 को मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप है कि इसरदा डैम के डूब क्षेत्र में स्थित सरकारी/कस्टोडियन भूमि पर सुनियोजित तरीके से कब्जा किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच में आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बावजूद पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
*कोतवाली पुलिस पर संरक्षण के आरोप*
मामले में शिकायतकर्ता रामधन चौधरी ने शहर कोतवाल टोंक भंवर लाल वैष्णव (पुलिस निरीक्षक) पर राजनीतिक दबाव में आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है और तत्काल निलंबन की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी एवं कस्टोडियन भूमि पर अवैध कब्जों को बढ़ावा मिलेगा।
*पुलिस का पक्ष : आंशिक आरोप पत्र दाखिल*
वहीं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले में अदालत में आंशिक आरोप पत्र (फाइनल रिपोर्ट/चार्जशीट) प्रस्तुत किया जा चुका है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत आगे की जांच जारी है।तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
*राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज*
कांग्रेस नेता सचिन पायलट के करीबी माने जाने वाले सरपंच हंसराज फागना का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इस मामले में हंसराज फागना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
*अब बड़ा सवाल यह है कि —*
* क्या कस्टोडियन भूमि हड़पने के आरोपों में दोषी पाए गए लोगों पर शीघ्र कानूनी शिकंजा कसेगा, या मामला जांच और फाइलों तक सीमित रह जाएगा?
* प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर यह प्रकरण आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बन सकता है।
