माइनरों में पानी न आने से 25 गांवों में धान रोपाई ठप, किसान परेशान

खखरेरू/स्मार्ट हलचल|फतेहपुर धान की रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में जरौली पंप कैनाल से निकलने वाली बराहटा, खखरेरू, अदमऊ और गढ़वा माइनरों में पानी न छोड़े जाने से क्षेत्र के करीब 25 गांवों के हजारों किसान संकट का सामना कर रहे हैं। सिंचाई के अभाव में धान की रोपाई लगभग ठप हो गई है, जबकि हजारों बीघा खेत सूखे पड़े हैं। लंबे समय से पानी न आने के कारण माइनरों में घास-फूस और जंगली झाड़ियां उग आई हैं, जिससे सिंचाई व्यवस्था और भी प्रभावित हो गई है।

इन माइनरों से चचिड़ा, कनपुरवा, खखरेरू, बैरी, लोहरपुर, घरवासीपुर, कबरे, शिवदासपुर, बराहटा, गुरगौला, अदमऊ, जयरामपुर, छनैनी, किशनपुर, चिरई, तक्कीपुर, कठारिया सहित करीब 25 गांवों की कृषि भूमि सिंचित होती है। क्षेत्र की प्रमुख फसल धान है, लेकिन समय पर पानी न मिलने से किसानों की तैयार नर्सरी पीली पड़ने लगी है और खेतों में रोपाई का कार्य प्रभावित हो गया है।

किसानों का कहना है कि यदि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक माइनरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की रोपाई पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी, जिससे इस वर्ष उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है। उनका आरोप है कि सिंचाई विभाग को कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो माइनरों की सफाई कराई गई और न ही समय पर पानी छोड़ा गया।

कृषक मुन्ना मिश्रा, लल्लू मिश्र, बी. सिंह, शिवराम शुक्ला, शिवभजन पाल, अगम सिंह यादव और शिवराम तिवारी सहित अन्य किसानों ने बताया कि एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती के कारण दिनभर में केवल दो से तीन घंटे ही विद्युत आपूर्ति मिल रही है, वहीं डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण निजी सिंचाई भी महंगी पड़ रही है। किसानों के अनुसार एक बीघा खेत की सिंचाई में 1800 से 2000 रुपये तक का डीजल खर्च आ रहा है। ऐसे में पानी के अभाव से नर्सरी खराब होने लगी है और खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।

किसानों ने प्रशासन से माइनरों की तत्काल सफाई कराकर उनमें पानी छोड़े जाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि धान की रोपाई समय पर पूरी हो सके और किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

सिंचाई विभाग के अवर अभियंता सुंदरलाल वर्मा ने बताया कि वर्तमान में विभाग को लगभग 2600 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है, जबकि अभी केवल 800 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध हो रहा है। इसी कारण सभी माइनरों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने में कठिनाई आ रही है। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों से पत्राचार कर मांग के अनुरूप पानी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। पर्याप्त पानी मिलते ही सभी माइनरों में आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बारिश का दौर समाप्त होने के बाद माइनरों की सिल्ट एवं झाड़ियों की सफाई का कार्य कराया जाएगा।