पूर्व राज्यमंत्री बोले— 100 बेड अस्पताल की स्वीकृति, पदों का सृजन और प्रशासनिक मंजूरी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी
चित्तौड़गढ़, स्मार्ट हलचल। राजस्थान सरकार के पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने कहा है कि कपासन उप जिला चिकित्सालय की स्वीकृति तथा वर्तमान में 32 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि का श्रेय वर्तमान विधायक अर्जुनलाल जीनगर को नहीं लेना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उप जिला चिकित्सालय की स्वीकृति एवं उससे जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पूरी हो चुकी थीं।
जाड़ावत ने बताया कि जुलाई 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के श्री सांवलियाजी दौरे के दौरान कपासन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को 50 से बढ़ाकर 100 बेड के उप जिला चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी। हालांकि इसके बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से निर्माण कार्य के टेंडर जारी नहीं हो सके।
कांग्रेस प्रवक्ता नवरतन जीनगर ने बताया कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री उदयलाल आंजना, पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत तथा तत्कालीन जिला कांग्रेस अध्यक्ष भेरूलाल चौधरी के प्रयासों से 12 जुलाई 2023 को क्रमोन्नयन के आदेश जारी हुए तथा 8 अक्टूबर 2023 को अस्पताल के लिए नए पदों की स्वीकृति भी प्रदान की गई। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 2023 के श्री सांवलियाजी प्रवास के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला चिकित्सालय में क्रमोन्नत करने की घोषणा की गई थी और सांवलिया मंदिर मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष भेरूलाल गुर्जर ने ट्रस्ट की ओर से अस्पताल भवन निर्माण कराने की घोषणा की थी।
जाड़ावत ने कहा कि स्वीकृत उप जिला चिकित्सालय में 100 बेड के साथ वरिष्ठ विशेषज्ञ, कनिष्ठ विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, डेंटल चिकित्सक, नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, वार्ड सहायक, नर्सिंग सहायक, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी सहित विभिन्न तकनीकी एवं सहायक पद स्वीकृत किए गए थे।
पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कपासन विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इन कार्यों का राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि उपलब्ध सरकारी दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि उप जिला चिकित्सालय की स्वीकृति, बेड क्षमता में वृद्धि और पदों की मंजूरी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही दी जा चुकी थी।
