शिवराज बारवाल मीना
– पांच विभागों की चुप्पी और पुलिस-वन विभाग की कथित सांठगांठ पर उठ रहे गंभीर सवाल,
– हाल ही में तीन पुलिस थानों अलीगढ़, बनेठा व सोप के आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर सांठगांठ के चलते गिर चुकी हैं गाज-फिर भी नहीं सुधर रहे हालात
टोंक/उनियारा ।स्मार्ट हलचल|उनियारा क्षेत्र में अवैध बजरी और पत्थर खनन-परिवहन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। हैरानी की बात यह है कि अवैध खनन रोकने के नाम पर गठित एसआईटी टीम केवल कागज़ों तक सीमित नजर आ रही है, जबकि धरातल पर कार्रवाई का कोई असर दिखाई नहीं देता।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन-रात बजरी, पत्थर और खनन सामग्री से लदे ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और डंपर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ये वाहन न केवल ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि आमजन की जान के लिए भी खतरा बन चुके हैं। कई बार हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से ठोस कार्रवाई का अभाव साफ दिखता है। जिसके चलते पूर्व में भी उनियारा सर्कल क्षेत्र का अलीगढ़, बनेठा, सोप, उनियारा व नगरफोर्ट थाने अवैध बजरी वह पत्र खनन मामले में सुर्खियों में रहते आ रहे हैं हाल के दिनों में तीन पुलिस थानों अलीगढ़, बनेठा व सोप थाने के आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर ड्यूटी में लापरवाही पर मिलीभगत व सांठगांठ के चलते गाज भी गिर चुकी है, उसके बावजूद भी क्षेत्र में अवैध बजरी परिवहन के हालात सुधारते नजर नहीं आ रहे हैं।
*पांच विभागों की जिम्मेदारी- फिर भी कार्रवाई शून्य*
अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी केवल एक विभाग की नहीं, बल्कि वन विभाग, पुलिस विभाग, राजस्व विभाग, उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, पटवारी और संबंधित निकाय (ग्राम पंचायत/नगरपालिका) सहित कम से कम पांच प्रशासनिक इकाइयों पर है। इसके बावजूद धरातल पर समन्वित कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े करता है। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी का गठन तो कर दिया गया, लेकिन न नियमित संयुक्त अभियान, न प्रभावी जब्ती, न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई। इससे यह धारणा बन रही है कि एसआईटी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।
*पुलिस-वन विभाग की कथित मिलीभगत पर चर्चा*
ग्रामीणों में चर्चा है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण विशेषकर पुलिस व वन विभाग) के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं हैं। आरोप है कि पुलिस और वन विभाग की कथित सांठगांठ व नरमी के कारण खनन माफिया बेखौफ होकर काम कर रहे हैं। कई बार तो पुलिस व वन विभाग के सरकारी वाहनों के सामने से वह उनके संरक्षण में अवैध बजरी व पत्थर परिवहन होता देखे जाने के मामले भी सामने आ चुके है। लगातार आमजन की शिकायतों के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगना लाजिमी है।
*“आमजन को दिखता है-अधिकारियों को क्यों नहीं?”*
अवैध बजरी और पत्थर से लदे वाहन क्षेत्र की मुख्य सड़कों से गुजरते हैं। कई बार तो ये वाहन प्रशासनिक कार्यालयों और चौकियों के सामने से निकलते हैं। यह दृश्य आम नागरिकों को साफ नजर आता है, लेकिन संबंधित अधिकारियों और कार्मिकों की ओर से कार्रवाई का अभाव समझ से परे है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है, तो जिम्मेदारों के “जू तक क्यों नहीं रेंग रही?” यदि आमजन को अवैध गतिविधियां दिख रही हैं, तो प्रशासनिक तंत्र की अनदेखी क्या दर्शाती है?
*पर्यावरण और जनसुरक्षा पर खतरा*
अवैध खनन से जहां पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, वहीं ग्रामीण मार्गों पर तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है। धूल-धक्कड़ और शोर से आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है, साथ ही किसानों की फसलें भी नुकसान झेल रही हैं।
*प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग*
स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन मांग की है कि एसआईटी की वास्तविक समीक्षा कर उसकी कार्यप्रणाली सार्वजनिक की जाए। संयुक्त अभियान चलाकर अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए। संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जाए। पुलिस व वन विभाग की कथित मिलीभगत की निष्पक्ष जांच हो। जब तक कागज़ी कार्रवाई से आगे बढ़कर धरातल पर सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक अवैध खनन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर चुप्पी साधे रहता है या फिर ठोस कार्रवाई कर जनता का भरोसा बहाल करता है।
– पांच विभागों की चुप्पी और पुलिस-वन विभाग की कथित सांठगांठ पर उठ रहे गंभीर सवाल,
– हाल ही में तीन पुलिस थानों अलीगढ़, बनेठा व सोप के आधा दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर सांठगांठ के चलते गिर चुकी हैं गाज-फिर भी नहीं सुधर रहे हालात
