(हरिप्रसाद शर्मा)
अजमेर/ स्मार्ट हलचल|अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह परिसर में कथित शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े बहुचर्चित मामले में बुधवार को अजमेर जिला न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान वादी पक्ष ने अदालत के समक्ष नए दस्तावेज और कथित ऐतिहासिक साक्ष्य पेश किए। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली तारीख 19 सितंबर 2026 तय की है।
वादी पक्ष ने अदालत में पेश किए नए दस्तावेज
सुनवाई के दौरान हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से संशोधित दावा अदालत में दाखिल किया गया। इसके साथ कई नए दस्तावेज और कथित ऐतिहासिक साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। वादी पक्ष का कहना है कि इन दस्तावेजों से उनके दावे को मजबूती मिलती है। हालांकि, इन दावों की सत्यता पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
वर्ष 1120 की पुस्तक का भी किया गया उल्लेख
वादी पक्ष की ओर से दावा किया गया कि प्रस्तुत साक्ष्यों में वर्ष 1120 की बताई जा रही पुस्तक ‘दलील- उल-आरफीन’ भी शामिल है। उनका कहना है कि यह पुस्तक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी द्वारा लिखी गई थी। वादी पक्ष ने अदालत में यह भी दावा किया कि संबंधित स्थल मूल रूप से भगवान शिव का मंदिर था और बाद में वहां दरगाह का निर्माण किया गया। हालांकि, यह वादी पक्ष का दावा है और इसकी सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा।
प्रतिवादी बनने की आठ याचिकाएं पहले ही हो चुकी हैं खारिज
महाराणा प्रताप सेना के वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील ए.पी. सिंह ने बताया कि मामले में प्रतिवादी बनने के लिए दायर आठ याचिकाओं को अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने संबंधित आवेदकों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था, लेकिन अब तक जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई गई है। उनके अनुसार यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।
19 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कानूनी प्रक्रिया जारी रही। अदालत ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इस बहुचर्चित मामले में आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश करेंगे।
