गुरला:-(बद्री लाल माली) भीलवाड़ा बहुचर्चित मांडल पट्टा प्रकरण में राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि जांच अधिकारी किसी भी कार्रवाई से पहले दोनों पक्षों के दस्तावेजों का निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से परीक्षण करें।
न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को सात दिन के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष अपना पक्ष और सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि प्रस्तुत दस्तावेजों पर पूरी गंभीरता से विचार करने के बाद ही कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा अपना प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करने के बाद 30 दिनों तक उन्हें इस एफआईआर में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में आवश्यकता हुई तो याचिकाकर्ता पुनः हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने एफआईआर को रद्द नहीं किया है, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच अधिकारी को सभी दस्तावेजों पर विचार करने के निर्देश दिए हैं तथा सीमित अवधि के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया है।
