चित्तौड़गढ़। स्मार्ट हलचल|पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने कहा कि जंतर-मंतर पर लंबे समय से संघर्ष कर रहे छात्रों के आंदोलन ने आखिरकार केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों, युवाओं और देशभर में न्याय की मांग कर रहे लाखों अभ्यर्थियों की जीत का प्रतीक है। यह उन विद्यार्थियों के संघर्ष की विजय है, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर लगातार आवाज बुलंद की।
जाड़ावत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने वर्षों तक छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया, 12 वर्षों में पहली बार मोदी सरकार को जोरदार झटका छात्रों ने दिया है उनके लोकतांत्रिक संघर्ष के आगे उसे झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों ने लाखों युवाओं के सपनों को तोड़ा, अनेक परिवारों को पीड़ा दी और कई छात्र मानसिक तनाव व अवसाद का शिकार हुए। ऐसे विद्यार्थियों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब दोषियों पर कठोर कार्रवाई कर परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी एवं पूरे विपक्ष के नेताओं ने संसद के भीतर और बाहर छात्रों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने लगातार छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद किया।
जाड़ावत ने आरोप लगाया कि बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं ने मोदी सरकार के सुशासन के दावों की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब चुप रहने वाला नहीं है और अपने अधिकारों के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्र शक्ति ने यह साबित कर दिया है कि जब युवा एकजुट होकर लड़ते हैं तो सत्ता के सबसे मजबूत सिंहासन भी हिल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि हाल ही में चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी जंतर मंतर पर छात्रों के साथ हुई बर्बरता को लेकर पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन किया कांग्रेस पार्टी छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी पूरी ताकत से लड़ती रहेगी तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित कराने के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी।
