अतिक्रमण रिपोर्ट में लापरवाही पर पटवारी हरदेव बैरवा बर्खास्त, विरोध में उतरा पटवार संघ..

जांच अधिकारी ने आरोप प्रमाणित नहीं माने, लेकिन कलेक्टर ने जताई असहमति बहाली की मांग।

(किशन वैष्णव)

शाहपुरा@स्मार्ट हलचल|तत्कालीन पटवारी हरदेव लाल बैरवा को अतिक्रमण की रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं करने के मामले में राजकीय सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद भीलवाड़ा जिले के कानूनगो एवं पटवारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया है। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने विभागीय जांच, उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के तहत बर्खास्तगी का आदेश जारी किया है। दूसरी ओर राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ जिला शाखा भीलवाड़ा ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए तत्काल पुनर्विचार और बहाली की मांग की है।

कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार हरदेव लाल बैरवा तत्कालीन समय में शाहपुरा तहसील के पटवार हल्का गिरड़िया में कार्यरत थे। उनके विरुद्ध 4 जनवरी 2024 को विभागीय आरोप पत्र जारी किया गया। आरोप था कि ग्राम नृसिंहपुरा की बिलानाम सरकारी भूमि की आराजी संख्या 527, रकबा 5.79 हेक्टेयर में खरीफ संवत 2080 के दौरान लगभग 0.05 हेक्टेयर भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण के संबंध में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा-91 के तहत तैयार की जाने वाली अतिक्रमण रिपोर्ट नियत समय पर तहसील कार्यालय में प्रस्तुत नहीं की गई। आदेश में इसे राजकीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता माना गया।

आरोप पत्र 15 जनवरी 2024 को हरदेव बैरवा को तामील कराया गया। उन्होंने 18 जनवरी 2024 को अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए सभी आरोपों का खंडन किया। इसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर शाहपुरा ने उपखंड अधिकारी शाहपुरा को जांच अधिकारी तथा तहसीलदार शाहपुरा को विभागीय पैरोकार नियुक्त कर विस्तृत जांच कराई।

जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2079 में इसी सरकारी भूमि पर हुए एक अन्य अतिक्रमण के विरुद्ध धारा-91 की कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया जा चुका था। बाद में कालू काना पिता रंगनाथ कालबेलिया द्वारा लगभग 0.05 हेक्टेयर भूमि पर नया अवैध अतिक्रमण किया गया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि तत्कालीन पटवारी ने सभी गांवों का मौका निरीक्षण कर अतिक्रमण रिपोर्ट तैयार कर ली थी, लेकिन वह रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने से पहले ही संबंधित घटना घटित हो गई। इसी आधार पर जांच अधिकारी ने आरोपों को प्रमाणित नहीं माना।

पटवार संघ के जिला अध्यक्ष बलवीर चौधरी और जिला कानूनगो संघ के जिला अध्यक्ष शिवेंद्र पारीक का कहना है कि धारा-91 के तहत अतिक्रमण रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त तक तहसील कार्यालय में प्रस्तुत की जाती है। संघ का दावा है कि संबंधित घटना रिपोर्ट प्रस्तुत करने की निर्धारित अंतिम तिथि से पहले ही घटित हो गई थी। इसलिए इस आधार पर बर्खास्तगी की कार्रवाई उचित नहीं है और आदेश का पुनरावलोकन कर हरदेव लाल बैरवा को पुनः सेवा में लिया जाना चाहिए।

इसके बाद 16 जुलाई 2026 को हरदेव बैरवा को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। हालांकि जिला कलेक्टर ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट, अभिलेखों, दस्तावेजों, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई का परीक्षण करने के बाद जांच अधिकारी के निष्कर्ष से असहमति व्यक्त की।

कलेक्टर ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी पटवारी की प्राथमिक जिम्मेदारी अपने क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा नहीं होने देना तथा कब्जा होने पर राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा-91 के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। आदेश में उल्लेख है कि ग्राम नृसिंहपुरा की उक्त भूमि पर अतिक्रमण की रिपोर्ट समय पर तहसील में प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण अवैध कब्जा बना रहा और उसी स्थान पर निर्मित कोयला भट्टी में एक नाबालिग की हत्या कर शव जलाने जैसी गंभीर घटना हुई। इसी आधार पर हरदेव बैरवा को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

सोमवार को सौंपा जाएगा ज्ञापन, मांग नहीं मानी तो बुधवार से हड़ताल

उधर राजस्थान कानूनगो एवं पटवार संघ जिला शाखा भीलवाड़ा की जिला मुख्यालय पर आयोजित बैठक में इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया गया। बैठक में जिलेभर से आए कानूनगो एवं पटवारियों ने सर्वसम्मति से बर्खास्तगी के निर्णय को एकतरफा बताते हुए तत्काल पुनर्विचार कर हरदेव बैरवा की सेवा बहाल करने की मांग की।

संघ ने निर्णय लिया है कि सोमवार को जिले की सभी उपशाखाओं के माध्यम से संबंधित उपखंड अधिकारियों के जरिए जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि ज्ञापन के बाद भी प्रशासन द्वारा पदच्युति के आदेश का पुनरावलोकन कर हरदेव बैरवा को पुनः सेवा में नहीं लिया गया, तो बुधवार से भीलवाड़ा जिले के सभी पटवारी एवं कानूनगो पूर्ण कार्य बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे।

हड़ताल होने पर नामांतरण, सीमांकन, गिरदावरी, फसल खराबा सर्वे, भूमि रिकॉर्ड संशोधन सहित अन्य राजस्व कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही निकट भविष्य में आयोजित होने वाले ग्रामीण सेवा शिविर एवं फॉलो-अप कैंपों पर भी असर पड़ने की संभावना है। संघ ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में आमजन को होने वाली असुविधा और प्रशासनिक कार्यों में आने वाले व्यवधान की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।