500 किलो आम से सजी आकर्षक झांकी के हुए दर्शन, श्रीहरि ने बदली लय; चातुर्मास के साथ आज से साधना और संयम का विशेष काल शुरू
‘जय जय गोविंद’ से गूंजा गोविंददेवजी मंदिर, देवशयनी एकादशी पर दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब
अजय सिंह (चिंटू)
जयपुर। स्मार्ट हलचल|देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर जयपुर स्थित ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देवजी महाराज में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ठाकुर श्रीजी के दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर भक्तों से गुलजार रहा और चारों ओर ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’, ‘जय जय गोविंद’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष गूंजते रहे।
देवशयनी एकादशी के अवसर पर मंदिर में ठाकुर श्रीजी की विशेष पूजा-अर्चना, पंचामृत अभिषेक और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान किए गए। महंत श्री अंजन कुमार गोस्वामी जी के सान्निध्य में ठाकुर श्रीजी का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रीजी को लाल रंग की नटवर वेश पोशाक, आकर्षक अलंकार, मुकुट और छड़ी धारण कराई गई।
इस अवसर पर भगवान श्री शालिग्राम जी को चांदी के रथ पर विराजमान कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मंदिर में करीब 500 किलो आम से सजी विशेष झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। आमों से सजी इस मनोहारी झांकी के दर्शन के लिए भक्तों में विशेष उत्साह नजर आया। पूजा के बाद ठाकुर श्रीजी को ऋतु फलों और विभिन्न दालों का भोग अर्पित किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का प्रारंभ माना जाता है। 25 जुलाई से शुरू हुआ यह पवित्र काल देवउठनी एकादशी तक चलेगा। इस दौरान विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर विराम रहता है, जबकि जप, तप, व्रत, दान और साधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस तरह देवशयनी एकादशी के साथ धार्मिक जीवन का एक नया चरण शुरू होता है—श्रीहरि विश्राम पर और भक्त साधना के पथ पर।
