विकास के दावों पर बड़ा सवाल: बाउंड्री बन गई, लेकिन श्मशान घाट पर आज तक नहीं मिली सुरक्षित छत
भीगती रहीं लकड़ियां, बारिश से जूझते रहे परिजन; वर्षों से मांग के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था
खामोर (भीलवाड़ा)। स्मार्ट हलचल|जीवन की अंतिम विदाई भी गुरुवार को सरकारी व्यवस्थाओं की बदहाली की गवाह बन गई। खामोर गांव के चानियां तालाब के निकट स्थित श्मशान घाट पर बावरी समाज के 65 वर्षीय मोहन बावरी का अंतिम संस्कार मूसलाधार बारिश के बीच करना पड़ा। श्मशान घाट पर लगा टीनशेड क्षतिग्रस्त होने से लगातार पानी टपकता रहा और अंतिम संस्कार के लिए रखी लकड़ियां भीगने लगीं। मजबूरन परिजनों और ग्रामीणों ने चिता और लकड़ियों को बचाने के लिए तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार पूरा किया।
बारिश के बीच अंतिम संस्कार में शामिल लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे। श्मशान घाट पर न पर्याप्त टीनशेड है, न विश्रांति गृह और न ही ऐसी व्यवस्था, जिससे अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को राहत मिल सके। सबसे संवेदनशील मौके पर भी लोगों को अव्यवस्थाओं के बीच अपने परिजन को अंतिम विदाई देनी पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से श्मशान घाट पर टीनशेड और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन शमशान घाट दर्ज तक नहीं किया गया।अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि जब चारदीवारी का निर्माण कराया जा सकता है, तो अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक टीनशेड क्यों नहीं बनाया गया।
तथ्य भी चौंकाने वाला
राज्यास रोड स्थित श्मशान घाट की करीब 4 बीघा भूमि राजस्व रिकॉर्ड में श्मशान के नाम दर्ज है। इसके बावजूद वहां भी आज तक पर्याप्त टीनशेड और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दर्ज श्मशान घाट होने के बावजूद वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का इंतजार है।गांव के लोगों ने प्रशासन से दोनों श्मशान घाटों पर तत्काल टीनशेड, विश्रांति गृह, पक्का पहुंच मार्ग और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि किसी भी परिवार को अंतिम विदाई जैसे संवेदनशील अवसर पर ऐसी पीड़ादायक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
