मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बजरी माफिया का ‘काला साम्राज्य’!
बनास नदी में कथित अवैध खनन का खेल, रोजाना कई दर्जन जेसीबी-एलएनटी मशीनें और सैकड़ों ट्रक-ट्रेलर दौड़ने का आरोप
मांडलगढ़। विधानसभा क्षेत्र में बनास नदी और उसके आसपास के इलाकों में कथित अवैध बजरी खनन को लेकर ग्रामीणों में रोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मालीखेड़ा, बिलिया, बिगोद, नीलकी खेड़ी और बदलियास सहित बनास नदी से जुड़े कई क्षेत्रों में बजरी का बड़े पैमाने पर कथित अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार नदी क्षेत्र में प्रतिदिन कई दर्जन जेसीबी और एलएनटी मशीनें खनन में लगी रहती हैं, जबकि बजरी परिवहन के लिए सैकड़ों ट्रक और ट्रेलर लगातार सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि भारी मशीनों के जरिए नदी क्षेत्र में लगातार खुदाई होने से बनास नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों के कारण नदी के पर्यावरण और आसपास के जलस्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
कई गांवों से होकर गुजर रहे भारी वाहन
स्थानीय लोगों के अनुसार बजरी से भरे भारी वाहन दिन-रात क्षेत्र की सड़कों से गुजर रहे हैं। मालीखेड़ा से बिलिया, बिगोद, नीलकी खेड़ी और बदलियास सहित आसपास के ग्रामीण मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से सड़कें क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार भारी वाहनों के दबाव के कारण कई सड़कें टूट चुकी हैं और जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क पर उड़ती धूल के कारण राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर तेज गति से दौड़ते भारी वाहनों के कारण हादसे का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भारी वाहनों की आवाजाही वाले मार्गों का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाए।
दिन-रात चलने का आरोप, निगरानी पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि नदी क्षेत्र में कथित खनन गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं। कई स्थानों पर मशीनों के जरिए बजरी निकालने और फिर ट्रक-ट्रेलरों से परिवहन किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने खनन विभाग और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि यदि नदी क्षेत्र में नियमों के विपरीत खनन हो रहा है तो संबंधित विभागों को मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए। वहीं यदि खनन और बजरी परिवहन वैध है तो इसकी अनुमति, खनन क्षेत्र और निर्धारित मात्रा की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।
बनास नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि बनास नदी क्षेत्र केवल बजरी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के पर्यावरण और जल व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मशीनों से खुदाई होने से भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ग्रामीणों ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराने और नियमों के विपरीत खनन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
ड्रोन से सर्वे और मशीनें जब्त करने की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मालीखेड़ा, बिलिया, बिगोद, नीलकी खेड़ी और बदलियास सहित पूरे क्षेत्र में विशेष अभियान चलाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी क्षेत्र का ड्रोन से सर्वे कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि कहां-कहां खनन गतिविधियां चल रही हैं। इसके अलावा खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और बजरी परिवहन में लगे वाहनों की भी जांच की जाए।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि अवैध खनन या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त हुई ग्रामीण सड़कों की मरम्मत कराने की भी मांग की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बनास नदी से जुड़े इन इलाकों में कथित रूप से इतनी बड़ी संख्या में जेसीबी-एलएनटी मशीनें और बजरी परिवहन करने वाले भारी वाहन किसकी अनुमति से संचालित हो रहे हैं? ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
