खखरेरू /स्मार्ट हलचल|फतेहपुर जुलाई माह समाप्त होने और अगस्त की शुरुआत के बावजूद क्षेत्र में पर्याप्त बारिश न होने से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कम वर्षा, सूखी नहरें, अघोषित विद्युत कटौती और लो वोल्टेज की समस्या ने धान की फसल को संकट में डाल दिया है। खेतों में नमी खत्म होने लगी है और कई स्थानों पर जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में किसान फसल बचाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद कर रहे हैं।
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि इस वर्ष जुलाई में सामान्य से काफी कम बारिश हुई, जिससे धान की रोपाई भी प्रभावित रही। किसानों के अनुसार पिछले वर्षों की तुलना में इस बार करीब 20 से 25 प्रतिशत तक कम रोपाई हो सकी है। जिन किसानों ने किसी तरह रोपाई कर भी ली, उनकी फसल अब पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गई है।
स्थिति को और गंभीर बनाने का काम सिंचाई व्यवस्था ने किया है। क्षेत्र की नहरें और माइनर सूखी पड़ी हैं, जिससे नहर आधारित सिंचाई पूरी तरह ठप है। दूसरी ओर, जिन किसानों के पास निजी ट्यूबवेल हैं, वे भी अघोषित बिजली कटौती और लगातार लो वोल्टेज की समस्या से परेशान हैं। पर्याप्त बिजली आपूर्ति न मिलने के कारण ट्यूबवेल ठीक से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे समय पर सिंचाई संभव नहीं हो रही।
सबसे अधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जो दूसरों के ट्यूबवेल पर निर्भर हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण उन्हें भी सिंचाई के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। खेतों से पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है और तेज धूप के चलते मिट्टी फटने लगी है। यदि जल्द ही पर्याप्त बारिश नहीं हुई और सिंचाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो धान की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है।
किसानों ने प्रशासन से क्षेत्र की नहरों में तत्काल पानी छोड़े जाने, ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा लो वोल्टेज की समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इस वर्ष धान उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
