जयशंकर और उज़्बेक विदेश मंत्री ने की रणनीतिक संबंधों की समीक्षा

शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली। स्मार्ट हलचल|उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सैदोव के साथ डॉ. एस. जयशंकर ने एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक साझेदारी की व्यापक और विस्तृत समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करना था।
डॉ. जयशंकर ने इस मुलाकात के बाद ‘एक्स’ पर लिखा उज़्बेकिस्तान के अपने दोस्त बख्तियोर सैदोव से मिलकर बहुत अच्छा लगा। हमने अपनी रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया गया। हमने क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा की और अपने बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
बैठक के दौरान अपने प्रारंभिक वक्तव्य में डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की विदेश नीति में उज़्बेकिस्तान के स्थान को रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत उज़्बेकिस्तान को अपने ‘विस्तारित पड़ोस’ का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा मानता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध आधुनिक समय में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी का आधार बने हैं।
डॉ. जयशंकर ने भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच नीतिगत समानताओं का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों ही विकासशील देश हैं और इस नाते अंतरराष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों का दृष्टिकोण बेहद समान है। उन्होंने विशेष रूप से सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया। जयशंकर ने कहा कि जब बात आतंकवाद, चरमपंथ (कट्टरवाद) और नशीली दवाओं की अवैध तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों की आती है, तो भारत और उज़्बेकिस्तान दोनों एक जैसा रुख साझा करते हैं। इन खतरों से निपटने के लिए दोनों देशों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने आपसी द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की, जो वर्तमान में लगभग 1 अरब डॉलर के स्तर पर है। दोनों पक्षों ने इस व्यापारिक आंकड़े को और बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। इस बार वार्ता में एक नया आयाम जोड़ते हुए पारंपरिक क्षेत्रों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और डिजिटल तकनीक) के साथ-साथ ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) और खनन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष रणनीतिक चर्चा हुई।