निवाई/ स्मार्ट हलचल|निवाई उपखण्ड क्षेत्र के गाँव काटोली में स्थित महाभारत कालीन माँ भद्रकाली वह शिव मंदिर के पीठाधीश्वर श्रीराम महाराज अघोरी ने चंद्रग्रहण के शुभ योग में लगभग 9 घंटे तक विशेष साधना कि इसके तत्पश्चात शाम 7:15 पर अपनी आराध्य देवी माँ भद्रकाली का सबसे पहले अपने खुद के रक्त से अभिषेक किया गाय का कच्चा दूध दही शहद घी मिश्री गंगा जल सब वस्तुएँ मिलाकर विशेष अभिषेक किया गया अघोरी बाबा ने बताया की रक्त अभिषेक इसलिए किया जाता है रक्त को अहंकार क्रोध मोह सांसारिक इच्छाओं का प्रतीक माना जाता है रक्त अभिषेक के माध्यम से साधक अपने आराध्य देवी के चरणों में अहंकार क्रोध मोह सांसारिक इच्छाओं को अर्पित करता हैं और ये अपने इष्ट के प्रति आत्म समर्पण बलिदान का सर्वोत्तम रूप माना जाता है और रक्त अभिषेक से देवी प्रसन्न होती हैं ओर रक्त अभिषेक को हट साधना भी कहते हैं जब कोई साधक अपने इष्ट को प्रसन्न करने के लिए अपने आपको कष्ट देता है इसको हठ योग साधना भी कहा जाता है अघोरी बाबा ने कहा मैं यह सिद्धि साधना अपने भक्तों के कल्याण के लिए करता हूँ जो सैकड़ों की तादात में माँ भद्रकाली की शरण में भक्त आते हैं और सभी की मनोकामना इन्हीं सिद्धि साधनाओं के प्रभाव सें पूर्ण होती है और संसार के सभी जीवों की माँ देवी माँ है और कोई भी माँ अपने बालक को कष्ट में नहीं देखती इसीलिए हम जैसे संत महात्मा हठ योग साधना करते हैं जिससे अपने आपके शरीर को बहुत कष्ट पहुँचता है और इन कष्टों को देखकर इष्ट जल्दी राज़ी हो जाता है।
