आस्था की डोर से जुड़ेंगे हजारों श्रद्धालु, 20 अगस्त से निकलेगी देवली-कोटड़ी श्याम की 27वीं विशाल पदयात्रा

:- शुभारंभ से पहले ठाकुरजी के चरणों में समर्पित किया आमंत्रण पत्र, पूजा-अर्चना कर मांगा सफल आयोजन का आशीर्वाद
राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी
स्मार्ट हलचल|देवली से कोटड़ी श्याम तक आयोजित होने वाली 27वीं विशाल पदयात्रा को लेकर धार्मिक माहौल बनने लगा है। यात्रा के शुभारंभ से पहले मंगलवार को श्री चारभुजानाथ कोटड़ी पदयात्रा मंडल के पदाधिकारियों ने श्री चारभुजानाथ मंदिर पहुंचकर ठाकुरजी के श्रीचरणों में पदयात्रा का आमंत्रण पत्र समर्पित किया। सामूहिक पूजा-अर्चना और अरदास के साथ यात्रा के निर्विघ्न, सफल एवं मंगलमय संपन्न होने की प्रार्थना की गई। पदयात्रा मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर लाल दीया के नेतृत्व में पहुंचे पदाधिकारियों ने विधिवत पूजा कर ठाकुरजी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया, ट्रस्ट पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। दीया ने बताया कि 27वीं विशाल पदयात्रा 20 अगस्त को सुबह 9:15 बजे देवली स्थित श्री चारभुजा मंदिर से रवाना होगी। पहले दिन यात्रा जहाजपुर पहुंचेगी जहां रात्रि विश्राम रहेगा। दूसरे दिन रोपा तथा तीसरे दिन बिरधोल में विश्राम के बाद 23 अगस्त (सावन सुदी ग्यारस) को सुबह 9:15 बजे पदयात्री कोटड़ी कृषि उपज मंडी पहुंचेंगे।जहां मंदिर ट्रस्ट एवं नगरवासियों की ओर से श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके बाद भगवान चारभुजानाथ की शोभायात्रा बैंड-बाजों और जयकारों के बीच नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली जाएगी जो चारभुजानाथ मंदिर पहुंचेगी। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद अभिजीत मुहूर्त में मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण होगा। इस दौरान चारभुजानाथ के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष सुदर्शन गाड़ोदिया ने बताया कि पदयात्रियों के लिए पेयजल, प्राथमिक उपचार, विश्राम, मार्गदर्शन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। आयोजन को सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन से भी समन्वय किया गया है। पदयात्रा मंडल ने क्षेत्र के श्रद्धालुओं, व्यापारियों एवं आमजन से पदयात्रा के स्वागत में सहभागिता निभाने और आयोजन को सफल बनाने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि देवली से कोटड़ी श्याम की यह पदयात्रा क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल चलकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
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