सावन का महीना शुरू होते ही खेतों, सड़कों और कई बार घरों के आसपास भी सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. सोशल मीडिया पर भी इस मौसम में सांपों के वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल होती हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या सावन में सचमुच सांप ज्यादा निकलते हैं और क्या इसका संबंध नाग पंचमी से है?
बारिश के कारण बिलों से बाहर आते हैं सांप
सांप आमतौर पर जमीन के अंदर बने बिलों, दरारों, झाड़ियों और घास के बीच छिपकर रहते हैं. सावन के दौरान तेज बारिश होने से इनके बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में इनके दिखने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.
तापमान और नमी बनाते हैं अनुकूल माहौल
सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं. उनके शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है. गर्मियों में तेज गर्मी और डिहाइड्रेशन के खतरे की वजह से वे कम सक्रिय रहते हैं. वहीं बरसात के मौसम में तापमान कम और नमी अधिक होने से उनके लिए बाहर निकलना आसान हो जाता है. इसलिए सावन में उनकी गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा दिखाई देती हैं.
भोजन की तलाश भी है बड़ी वजह
मानसून में मेंढक, चूहे और कीड़े-मकोड़े तेजी से बढ़ते हैं. यही जीव सांपों का मुख्य भोजन हैं. जब भोजन आसानी से मिलने लगता है तो सांप भी ज्यादा सक्रिय होकर शिकार की तलाश में बाहर निकलते हैं. इसलिए बारिश के मौसम में उनका दिखना स्वाभाविक माना जाता है.
प्रजनन काल का भी पड़ता है असर
जानकारों के मुताबिक कई प्रजातियों के सांपों का प्रजनन काल भी मानसून के दौरान होता है. इस समय वे साथी की तलाश में अधिक दूरी तय करते हैं. इससे भी लोगों को सांप पहले की तुलना में ज्यादा नजर आते हैं.
नाग पंचमी और धार्मिक मान्यता
सावन में ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जो नाग देवता और भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे सर्पदंश के भय से रक्षा होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. हालांकि, इसी समय सांप प्राकृतिक कारणों से ज्यादा दिखाई देते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि उनका संबंध सीधे नाग पंचमी से है.
