* सोहेला-बोरखंडी वन नाका की सरकारी जमीन पर विवाद गहराया-ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच व सुरक्षा की उठाई मांग
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/पीपलू।स्मार्ट हलचल|टोंक वन रेंज के सोहेला-बोरखंडी वन नाका क्षेत्र स्थित करीब 67 बीघा वन भूमि पर एक बार फिर कथित कब्जे का खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि भूमाफिया इस सरकारी वन भूमि पर कब्जा करने की फिराक में हैं, जबकि वन विभाग की उदासीनता से उनके हौसले लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1962 के राजस्व सेटलमेंट के दौरान संबंधित खसरे में कथित रूप से छेड़छाड़ कर बाद में भूमि का आवंटन किया गया था। उनका दावा है कि बाद में वन एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा कराई गई संयुक्त पैमाइश में यह भूमि वन विभाग की होना प्रमाणित हुई। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1964 में तत्कालीन फॉरेस्टर गुलाब खान ने राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त पैमाइश कराकर मौके पर सीमेंट के सीमा चिन्ह (मुड़ियां) स्थापित करवाए तथा पूरी 67 बीघा भूमि वन विभाग के कब्जे में ली गई। इसके बावजूद समय-समय पर इस भूमि पर कब्जे के प्रयास होते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2017 में भी कथित रूप से भूमाफियाओं द्वारा कब्जे का प्रयास किया गया था। उस समय तत्कालीन फॉरेस्टर विजय सिंह ने पुनः राजस्व एवं वन विभाग की संयुक्त पैमाइश करवाई।ग्रामीणों के अनुसार इस पैमाइश में पहले से स्थापित सीमा चिन्ह सही पाए गए और संबंधित भूमि को फिर से वन विभाग की संपत्ति माना गया।इसके बाद तत्कालीन अधिकारियों ने तहसील प्रशासन को पत्र लिखकर भूमि पर किसी भी प्रकार का आवंटन, काश्त या छेड़छाड़ नहीं करने का आग्रह किया था। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के रिकॉर्ड, लट्ठा सीट तथा पूर्व में किए गए सीमांकन भी इस भूमि को वन विभाग की संपत्ति दर्शाते हैं। इसके बावजूद अब दोबारा कब्जे की आशंका से क्षेत्र के लोगों में चिंता बढ़ गई है।ग्रामीणों ने कहा कि एक ओर सरकार हरित क्षेत्र बढ़ाने और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर बहुमूल्य वन भूमि पर कथित अतिक्रमण की आशंका गंभीर चिंता का विषय है। उनका सुझाव है कि यदि इस भूमि पर नियमित पौधरोपण, फेंसिंग और वन विकास कार्य कराए जाएं तो अतिक्रमण की संभावना काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
*ग्रामीणों की प्रमुख मांगें*
* पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
* वन भूमि का पुनः सीमांकन एवं स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
* यदि किसी प्रकार के अवैध कब्जे या अनियमितता के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
* वन विभाग इस भूमि पर नियमित पौधरोपण एवं संरक्षण कार्य शुरू करे।
