ओम जैन
शंभूपुरा। स्मार्ट हलचल|जैन सिद्धान्ताचार्य प्रतिभा श्री जी महाराज साहब ने शान्ति भवन सेंती मे चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला मे संसार में सर्वश्रेष्ठ बल कौनसा है पर अपने विचार रखते हुए उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को लाभान्वित किया।
उन्होंने प्रवचन में कहा कि संसार मे कई प्रकार के बल है, जिसमे शारीरिक बल, सत्ताबल, नैतिक बल, आध्यात्मिक बल किन्तु बुद्धि बल के अभाव मे सभी बल परास्त हो जाते है। ग्रन्थों में अभयकुमार धन्नासेठ बीरबल आदि के बुद्धि सम्बन्धी प्रसंग काफी प्रसिद्ध है। बुद्धिबल से हर समस्या का समाधान सम्भव है। बुद्धि बल से भी अधिक श्रद्धा बल व समर्पण बल अधिक महत्वपूर्ण है। आचार्य मान्तुम ने अपनी श्रद्धा व समर्पण बल से एवं दिव्य शक्ति से ताले व साखले तोड़ दी थी।
साध्वी प्रेक्षा श्री जी ने कहा कि मोबाइल बनकर मत जीओ अपितु मानव बनकर जीओ। बहुमूल्य समय अपने परिवार व समाज को दो। समय के साथ जीने वाले श्रावक संयम का पालन करके मोक्ष मे चले गए।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे।
