वर्षों की पेयजल समस्या खत्म, कोटा विश्वविद्यालय में शुरू हुई नियमित जलापूर्ति
मुख्य अतिथ ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने वर्चुअली जुडे, कुलगुरू प्रो. बी.पी. सारस्वत ने जलापूर्ति का किया शुभारंभ
विश्वविद्यालय विकास के हर कार्य में सरकार देगी पूरा सहयोग — उर्जा मंत्री हीरालाल नागर
24 वर्षों की पेयजल समस्या का हुआ स्थायी समाधान —कुलगुरू प्रो.बी.पी.सारस्वत
कोटा। स्मार्ट हलचल|चंबल नदी के किनारे स्थित कोटा विश्वविद्यालय को स्थापना के लगभग 24 वर्ष बाद आखिरकार पाइपलाइन के माध्यम से चंबल का शुद्ध पेयजल मिलना शुरू हो गया। शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में निर्मित उच्च जलाशय, स्वच्छ जलाशय, पंप हाउस एवं पेयजल पाइपलाइन परियोजना का लोकार्पण ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने वर्चुअली किया। विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति प्रो. बी.पी. सारस्वत ने विधिवत पूजन-अर्चन के बाद प्रेशर वाल्व खोलकर जलापूर्ति का शुभारंभ किया।
संपदा अधिकारी संजीव कुमार दुबे ने बताया कि नागार्जुन भवन में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इसे विश्वविद्यालय के इतिहास की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रबंध मंडल के सदस्य रहते पौधारोपण प्रकल्प के प्रयास किए थे जो पानी की कमी की वहज से चुनौतीपूर्ण रहा। इस परियोजना से हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर के हरित क्षेत्र को भी पर्याप्त एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय के विकास, नए पदों की स्वीकृति तथा छात्र हित से जुड़े हर कार्य में पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा पिछले एक वर्ष में किए गए विकास कार्यों और अंतरराष्ट्रीय एमओयू जैसी उपलब्धियों की भी सराहना की।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरू प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा कि चंबल नदी के तट पर स्थित होने के बावजूद विश्वविद्यालय लगभग 24 वर्षों से शुद्ध पेयजल की सुविधा से वंचित था। कुलगुरू का कार्यभार संभालते ही उन्होंने इस समस्या के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भूजल मंत्री कन्हैयालाल चौधरी, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा,लाडपुरा विधायक कल्पना देवी तथा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सहयोग से यह सपना आज साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि अब विश्वविद्यालय की वर्षों पुरानी प्यास बुझ गई है।
प्रो. सारस्वत ने बताया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। एआई तथा बूंदी शैलचित्र अध्ययन जैसे नए पाठ्यक्रमों की मान्यता प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और शीघ्र ही विद्यार्थियों को इनका लाभ मिलेगा।
समारोह में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. निमित चौधरी, कृषि विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. विमला डूंकवाल तथा वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. बी.एल. वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय ने एक वर्ष की अवधि में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि “वन यूनिवर्सिटी, वन टीम” की भावना से किए गए कार्यों का परिणाम आज पूरे प्रदेश के सामने है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशासी अभियंता दीपक झा ने परियोजना की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 10.80 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में लगभग 6.6 किलोमीटर लंबी 250 मिमी व्यास की डीआई राइजिंग मेन पाइपलाइन, विभिन्न क्षमता की वितरण पाइपलाइनें, 500 किलोलीटर क्षमता का उच्च जलाशय, 400 किलोलीटर क्षमता का स्वच्छ जलाशय, दो पंप हाउस, फ्लोमीटर सहित आवश्यक सिविल एवं मैकेनिकल कार्य शामिल हैं। इस परियोजना से विश्वविद्यालय परिसर में गुणवत्तापूर्ण एवं पर्याप्त पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित हो गई है।
भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने इसे विश्वविद्यालय परिवार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह गौरव और संतोष का क्षण है। वर्षों पुरानी समस्या अब स्थायी समाधान में बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से शिक्षा नगरी कोटा की पहचान और अधिक सशक्त हुई है तथा विश्वविद्यालय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. बी.पी. सारस्वत के एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जिसमें “सारस्वत मॉडल” के अंतर्गत एक वर्ष में संपन्न विकास कार्यों और नवाचारों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव मुरलीधर प्रतिहार ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यक्रम का संचालन प्रो.जॉली भण्डारी ने किया।
कार्यक्रम में प्रबंध मंडल के सदस्य, विभिन्न संकायों के विश्वविद्यालय के संपदा अधिकारी संजीव कुमार दुबे ने कुलगुरु एवं अतिथियो का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रो. ओ.पी. ऋषि, प्रो. भवानी सिंह, प्रो. घनश्याम शर्मा, प्रो. जे.पी. शर्मा,मनीष वशिष्ट,धाकड भगतसिंह सहित कई शिक्षाविद, अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अधिष्ठाता, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
