12वीं तक स्कूल लेकिन गुरुजी सिर्फ 6: नृसिंह बासनी में शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर, ग्रामीणों ने विधायक को सौंपा प्रार्थना पत्र,

लुकमान शाह

ग्रामीणों ने पिछले साल अपने स्तर पर पैसे जुटाकर वैकल्पिक शिक्षक लगाए ताकि बोर्ड परीक्षा की तैयारी हो सके
थांवला। नृसिंह बासनी।स्मार्ट हलचल|क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा का ढर्रा पूरी तरह चरमरा गया है। सरकार एक तरफ डिजिटल इंडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कस्बे के इस 12वीं तक के स्कूल में महज 6 शिक्षकों के भरोसे सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है।बोर्ड परीक्षाओं पर संकट, खाली पड़े हैं मुख्य विषय स्कूल में पहली से 12वीं कक्षा तक कुल 12 क्लासें हैं, लेकिन पढ़ाने के लिए सिर्फ 6 अध्यापक मौजूद हैं। इसका सीधा मतलब है कि एक शिक्षकों पर दो से तीन कक्षाओं की जिम्मेदारी है। बोर्ड कक्षाओं (10वीं और 12वीं) के विद्यार्थियों का कोर्स आधा भी नहीं हो पाया है। अंग्रेजी, गणित और विज्ञान पीटीआई जैसे महत्वपूर्ण विषयों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और पीटीआई (PTI) जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं हैं। शिक्षकों के अभाव में बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। बीते कुछ वर्षों में तो ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पैसे जुटाकर वैकल्पिक शिक्षक लगाए ताकि बोर्ड परीक्षा की तैयारी हो सके, लेकिन इस वर्ष भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इससे बच्चों और उनके अभिभावकों में गहरा रोष और चिंता व्याप्त है।
विधायक का आश्वासन:शिकायत सुनने के बाद विधायक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि यह एक गंभीर विषय है। उन्होंने तुरंत ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से फोन पर बात की और स्कूल में जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति (Deputation) करने के निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि वे इस मुद्दे को सरकार के उच्च स्तर पर भी उठाएंगे।
*:-इनका कहना है*
हमने शिक्षकों की कमी को लेकर
कोड पीओ को सूचना कर दी है। जहां कोड़ पीओ के आदेश पर 2 टीचरों के डेपुटेशन पर आदेश करें पर उन्होंने जॉइनिंग नहीं की
प्रधानाचार्य आभा जैन रा उ मा वि नृसिंह बासनी

ऐसे विद्यालयों का शीघ्र निरीक्षण कराने के निर्देश दिए, जहां विद्यार्थियों की संख्या कम होने के बावजूद शिक्षकों की संख्या अधिक है। ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा। इससे शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित होगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था मिल सकेगी।

*विधायक अजयसिंह किलक डेगाना*