कुरीतियों और नशे के खिलाफ एकजुट हो समाज, युवा पीढ़ी को बचाना होगा : धर्मेंद्र सिंह मीणा

विश्व आदिवासी दिवस पर जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में समाज की शिक्षा, एकता और महिला सम्मान पर दिया जोर

जयपुर। स्मार्ट हलचल|विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जयपुर में मुलकती आदिवासी मीना समाज संस्था मत्स्य (राजस्थान) के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्रदेशाध्यक्ष जमाल की मीना ने की। उन्होंने समाज को संगठित होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि सामाजिक एकता ही समाज की मजबूती का आधार है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धर्मेंद्र सिंह मीणा, पूर्व अति वरिष्ठ महानिदेशक रहे। उन्होंने डीआरडीओ के अग्नि मिसाइल प्रोजेक्ट में करीब 18-19 वर्षों तक अपनी सराहनीय सेवाएं दी हैं। वर्तमान में वे सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए केवल बड़े आयोजन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक स्तर पर निर्णायक कदम उठाने होंगे।

पाखंडवाद, दहेज और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियां खत्म करनी होंगी

धर्मेंद्र सिंह मीणा ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि पाखंडवाद, दहेज प्रथा और मृत्यु भोज जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करना होगा। जब तक समाज इन कुरीतियों से मुक्त नहीं होगा, तब तक वास्तविक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल रहेगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुधार की शुरुआत प्रत्येक परिवार से होनी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। कहा कि पिछले 8-10 वर्षों से गांव-गांव में युवा नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। हेरोइन, स्मैक सहित अन्य नशीले पदार्थों का सेवन युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ समाज को जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को इससे दूर करना होगा।

उन्होंने कहा कि नशे के बढ़ते जाल के पीछे बड़े षड्यंत्र की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि समय रहते युवाओं को जागरूक नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए अभिभावकों, समाज के प्रबुद्धजनों और युवाओं को मिलकर नशे के खिलाफ अभियान चलाने की जरूरत है।

बेटा-बेटी में भेद नहीं, दोनों को समान सम्मान मिले

वक्ताओं ने महिला सम्मान और बेटियों की शिक्षा पर भी जोर दिया। कहा कि बेटा और बेटी दोनों को समान सम्मान और अवसर देना होगा। समाज तभी आगे बढ़ेगा, जब बेटियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने के समान अधिकार मिलेंगे।

कार्यक्रम में शिक्षा को समाज की प्रगति का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए भीष्म विकास मीणा ने कहा कि “शिक्षा शेरनी का दूध है, जो पीएगा वही दहाड़ेगा।” उन्होंने समाज के युवाओं से शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन लेखक एवं उद्घोषक ताराचंद चीता ने प्रभावी ढंग से किया। कार्यक्रम में गायत्री देवी सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, महिलाएं और समाज के लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने विश्व आदिवासी दिवस को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर समाज में शिक्षा, एकता, नशामुक्ति और सामाजिक सुधार का संकल्प लेने का आह्वान किया।