भीलवाड़ा । राशन कार्ड में नए सदस्यों के नाम जोड़ने के लिए जिस पोर्टल को ‘राहत’ बताया जा रहा था, वह अब आमजन के लिए ‘आफत’ साबित हो रहा है। बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू हुए इस पोर्टल को एक महीना बीतने को है, लेकिन स्थिति यह है कि आवेदन केवल ‘Submitted’ ही दिखा रहे हैं। न पोर्टल आगे बढ़ रहा है, न अधिकारियों की फाइलें।
पोर्टल की ‘सर्जरी’ की जरूरत: 150 KB में कैसे दिखेंगे दस्तावेज?
एक तरफ अधिकारी कहते हैं कि आवेदन के साथ वर्तमान राशन कार्ड, आधार, जनआधार, जन्म प्रमाण पत्र और मैरिज सर्टिफिकेट जैसे ढेरों दस्तावेज अपलोड करें। दूसरी ओर, पोर्टल पर फाइल साइज की लिमिट मात्र 150 KB रखी गई है।
सवाल: इतने सारे दस्तावेजों को कंप्रेस (छोटा) करने पर उनकी क्वालिटी इतनी खराब हो जाती है कि कुछ भी पढ़ा नहीं जाता।
आशंका: क्या विभाग ने यह 150 KB की लिमिट इसलिए रखी है ताकि बाद में ‘दस्तावेज स्पष्ट नहीं हैं’ का बहाना बनाकर आवेदन रिजेक्ट किए जा सकें? यदि अधिकारी को साफ दस्तावेज चाहिए, तो फाइल साइज कम से कम 1 MB क्यों नहीं?
फुटबॉल बनी जनता: BDO बोले हमारे पास डेटा नहीं, तो वेरिफिकेशन करेगा कौन?
आवेदन करने वाले लोग जब ब्लॉक कार्यालय (BDO) चक्कर काटते हैं, तो जवाब मिलता है कि नए पोर्टल का डेटा उनके पास पहुँच ही नहीं रहा है। अब सवाल यह है कि अगर डेटा ब्लॉक स्तर पर नहीं है, जिला स्तर पर अटका है या राज्य स्तर पर फंसा है, तो इसका वेरिफिकेशन कौन करेगा? क्या जनता केवल पोर्टल पर स्टेटस चेक करने के लिए आवेदन कर रही है?
सिस्टम की पेचीदगियां: पहले जनआधार सुधारो, फिर राशन कार्ड का सपना देखो
पोर्टल की शर्त है कि पहले जनआधार में नाम हो, फिर सबकी आधार सीडिंग हो, फिर e-KYC हो, और उसके बाद जनआधार-राशन कार्ड की मैपिंग हो। जब यह सारी प्रक्रिया जनआधार के वक्त पहले ही पूरी की जा चुकी है, तो राशन कार्ड पोर्टल पर दोबारा वही दस्तावेज क्यों मांगे जा रहे हैं? क्या विभाग को अपने ही ‘जनआधार’ डेटा पर भरोसा नहीं है?
अधिकारियों से सीधे सवाल:
जब जनआधार की PDF ही मांगी जा रही है, तो अन्य दस्तावेजों का दबाव क्यों?
एक महीने से ‘Submitted’ पड़े आवेदनों पर अब तक एक कदम भी आगे कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या यह पोर्टल केवल सुर्खियां बटोरने के लिए खोला गया है या वाकई जनता को राशन दिलवाने के लिए?
”जनता ई-मित्रों के चक्कर काट-काटकर थक चुकी है। पोर्टल पर तकनीकी सुधार और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह योजना केवल कागजी साबित होगी।”
