400 मासूमों की शिक्षा पर मंडराया संकट! फर्जी पट्टे के विरोध में स्कूल के बाहर गरजे ग्रामीण व छात्र ने किया धरना प्रदर्शन

1984 से संचालित विद्यालय की 2.5 बीघा भूमि पर कथित फर्जी पट्टे का आरोप, जांच होने तक कब्जा-सुपुर्दगी रोकने की मांग

चारागाह भूमि पर कैसे बना 2400 गज का ‘फर्जी’ पट्टा? गोविंदपुरा स्कूल विवाद ने पंचायती राज व्यवस्था पर उठाए सवाल

अनिल कुमार

ब्यावर। स्मार्ट हलचल|उपखंड क्षेत्र के राजस्व ग्राम गोविंदपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विद्यालय की लगभग 2.5 बीघा भूमि पर एक पक्ष द्वारा वर्ष 1980-81 का कथित फर्जी व कूटरचित पट्टा पेश किए जाने के विरोध में ग्रामीणों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने विद्यालय के मुख्य द्वार के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया तथा सड़क जाम कर विरोध जताया।

400 विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उक्त भूमि पर वर्ष 1984 से लगातार विद्यालय संचालित हो रहा है, जिसमें वर्तमान में करीब 400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इतने वर्षों में सरकारी मद से विद्यालय भवन, कमरों और चारदीवारी का निर्माण कराया गया है तथा बिजली-पानी के कनेक्शन भी स्वीकृत हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस पट्टे के आधार पर भूमि पर दावा किया जा रहा है, वह संदिग्ध है क्योंकि उसमें खसरा नंबर का स्पष्ट उल्लेख नहीं है और तत्कालीन समय में यह भूमि ‘चारागाह’ श्रेणी में दर्ज थी।

विधायक पहुंचे धरना स्थल, दिया आश्वासन
मामले की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक श्री शंकर सिंह रावत धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही जिला शिक्षा अधिकारी (ब्यावर) तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य को तलब किया। विधायक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रकरण की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और विद्यार्थियों के हितों से कोई खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
वीरेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल—जिसमें गणपत गोवल,गणपत सिंह रावत, निखिल रावत, श्री बाबा रामदेव सेवा समिति के अध्यक्ष चिराग मेघवाल सहित सैकड़ों ग्रामवासी शामिल थे—ने जिला कलेक्टर, ब्यावर को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में मुख्य मांगें:

वर्ष 1980-81 के कथित पट्टे, पंचायत रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखों की गहनता से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जांच प्रक्रिया पूरी होने तक विद्यालय भूमि की कब्जा-सुपुर्दगी या बेदखली की किसी भी प्रस्तावित कार्यवाही पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

विद्यालय में वर्षों से अध्ययनरत बच्चों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित निर्णय लिया जाए।

प्रदर्शन के दौरान विजय सिंह, भंवर सिंह, दिलीप सेन, नारायण सिंह, चेतन सिंह, गजेंद्र सिंह, पृथ्वीराज भाट सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व अभिभावक मौजूद रहे।