जयपुर। स्मार्ट हलचल|कुमावत समाज की शिल्प, स्थापत्य, कला और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने की दिशा में कुमावत क्षत्रिय पत्र ट्रस्ट की ओर से प्रकाशित ‘शिल्पकला विशेषांक’ का विमोचन पशुपालन एवं डेयरी, गौपालन एवं देवस्थान विभाग के मंत्री जोराराम कुमावत ने किया। विशेषांक में समाज के शिल्पकारों, मूर्तिकारों, वास्तुकारों, इंजीनियरों, संगीतज्ञों सहित विभिन्न तकनीकी एवं रचनात्मक क्षेत्रों में योगदान देने वाली प्रतिभाओं और उनके कार्यों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि यह विशेषांक महज एक पत्रिका नहीं, बल्कि समाज की कला, कौशल, परिश्रम और गौरवशाली परंपरा का दस्तावेज है। राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतों, मंदिरों, हवेलियों और स्थापत्य धरोहरों में कुमावत समाज के शिल्पकारों की प्रतिभा और मेहनत की स्पष्ट छाप मिलती है। उन्होंने कहा कि ऐसी विरासत को संकलित कर सुरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
विशेषांक में शिल्प एवं स्थापत्य परंपरा से जुड़े व्यक्तित्वों के जीवन-वृत्त, उनके ऐतिहासिक योगदान और उल्लेखनीय कार्यों को शोधपरक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। भवन निर्माण, मूर्तिकला, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, संगीत और अन्य क्षेत्रों में समाज की उपलब्धियों को भी इसमें स्थान दिया गया है।
ट्रस्ट अध्यक्ष रामपाल कुमावत (जूनवाल) ने बताया कि कुमावत क्षत्रिय पत्रिका पिछले 60 वर्षों से निरंतर प्रकाशित होकर समाज की गतिविधियों, उपलब्धियों और प्रतिभाओं को देशभर तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। ट्रस्ट की ओर से अब तक 13 विशेषांक प्रकाशित किए जा चुके हैं। ‘शिल्पकला विशेषांक’ इसी परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसका उद्देश्य समाज के गौरवशाली अतीत को सहेजते हुए उसकी विरासत को भावी पीढ़ी तक पहुंचाना है।
विमोचन अवसर पर लालचंद राहोरिया, रामधन देवतवाल, रामगोपाल निमीवाल, राकेश सिरोहिया, हरीशचंद्र पारमवाल, जयसिंह गुडीवाल, बृजगोपाल नीमीवाल, आशुतोष कुमावत, अशोक तुनगरिया, लक्ष्मीकांत कुदीवाल, मनोज कुमावत सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित रहे।
