विधायक गोपाल लाल शर्मा (खंडेलवाल) के बेटे मुकेश कुमार शर्मा (खंडेलवाल) को DMFT में ट्रस्टी बनाए जाने पर उठे सवाल

मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से गैर-सरकारी ट्रस्टी के रूप में मनोनयन, सरकारी दस्तावेज में दर्ज नाम को लेकर सामने आई स्थिति

मांडलगढ़, स्मार्ट हलचल। मांडलगढ़ विधायक गोपाल लाल शर्मा (खंडेलवाल) के पुत्र मुकेश कुमार शर्मा (खंडेलवाल) को भीलवाड़ा जिला डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की गवर्निंग काउंसिल में विधानसभा क्षेत्र के गैर-सरकारी ट्रस्टी के रूप में मनोनीत किए जाने के बाद इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।उपलब्ध सरकारी दस्तावेज में मुकेश कुमार शर्मा का नाम नियम 5(1)(29) के अंतर्गत “विधानसभा क्षेत्र के गैर सरकारी ट्रस्टी” की श्रेणी में दर्ज है। दस्तावेज में उनका नाम मुकेश कुमार शर्मा के रूप में दर्ज दिखाई देता है, जबकि सार्वजनिक एवं राजनीतिक पहचान में उन्हें मुकेश खंडेलवाल के नाम से जाना जाता है।

सरकारी रिकॉर्ड में अलग नाम, सार्वजनिक पहचान खंडेलवाल

दस्तावेज में विधायक का नाम भी गोपाल लाल शर्मा के रूप में दर्ज होने की बात सामने आती है, जबकि राजनीतिक एवं सार्वजनिक क्षेत्र में वे गोपाल खंडेलवाल के नाम से पहचाने जाते हैं। इसी प्रकार उनके पुत्र का नाम सरकारी दस्तावेज में मुकेश कुमार शर्मा दर्ज है, जबकि सार्वजनिक तौर पर वे मुकेश खंडेलवाल नाम से जाने जाते हैं।

इस स्थिति के चलते नियुक्ति से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड और सार्वजनिक पहचान के बीच नामों को लेकर भी चर्चा हो रही है।

DMFT में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के हितों से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। DMFT के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण सहित विभिन्न विकास एवं जनहित के कार्यों के लिए राशि का उपयोग किया जाता है।

ऐसे में गवर्निंग काउंसिल में ट्रस्टी का पद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला माना जाता है। विधानसभा क्षेत्र से गैर-सरकारी ट्रस्टी के रूप में मुकेश कुमार शर्मा के मनोनयन के बाद अब क्षेत्र में इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

विधायक के पुत्र को जिम्मेदारी मिलने पर राजनीतिक चर्चा

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे विधायक गोपाल लाल शर्मा (खंडेलवाल) के पुत्र को उसी विधानसभा क्षेत्र से संबंधित DMFT में गैर-सरकारी ट्रस्टी के रूप में मनोनीत किया गया है।

हालांकि उपलब्ध दस्तावेज में मनोनयन नियम 5(1)(29) के तहत किया गया है और केवल किसी व्यक्ति का विधायक का पुत्र होना अपने आप में नियुक्ति को नियमविरुद्ध साबित नहीं करता। लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि के परिवार के सदस्य को महत्वपूर्ण सरकारी संस्था में जिम्मेदारी मिलने के कारण पारदर्शिता, चयन के आधार और हितों के संभावित टकराव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सवाल नियुक्ति की प्रक्रिया और आधार पर

अब क्षेत्र में यह सवाल चर्चा का विषय है कि मुकेश कुमार शर्मा का मनोनयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ, उनकी अनुशंसा किस स्तर से की गई तथा विधानसभा क्षेत्र से गैर-सरकारी ट्रस्टी के चयन के लिए किन आधारों को प्राथमिकता दी गई।

DMFT जैसी संस्था में, जहां खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं, वहां नियुक्तियों की प्रक्रिया को पारदर्शी रखना और उसके आधार को सार्वजनिक करना जनता के विश्वास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

मांडलगढ़ क्षेत्र के लोगों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि नए ट्रस्टी के रूप में मुकेश कुमार शर्मा (खंडेलवाल) की भूमिका खनन प्रभावित गांवों और आमजन के हितों में किस प्रकार सामने आती है।

नोट: उपलब्ध सरकारी दस्तावेज में नाम गोपाल लाल शर्मा और मुकेश कुमार शर्मा के रूप में दर्ज दिखाई देते हैं। सार्वजनिक पहचान के आधार पर कोष्ठक में (खंडेलवाल) का प्रयोग किया गया है।