वार्डों की जनसंख्या, मतदाता आंकड़ों और मकानवार रिकॉर्ड में असमानता का दावा; आपत्तियों पर प्रभावी विचार नहीं किए जाने का भी आरोप
बीगोद, स्मार्ट हलचल। बीगोद नगर पालिका के वार्डों के पुनर्गठन एवं परिसीमन को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में सिविल रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। याचिका में 1 सितंबर 2025 को जारी वार्ड गठन संबंधी अधिसूचना को चुनौती देते हुए राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 9 एवं 10 तथा संबंधित निर्वाचन नियमों के अनुरूप नए सिरे से परिसीमन कराने की मांग की गई है।याचिका में बीगोद नगर पालिका के 25 वार्डों के गठन को लेकर जनसंख्या एवं मतदाता संख्या में कथित असमानता का मुद्दा उठाया गया है। इसमें बताया गया है कि कुछ वार्डों में लगभग 200 से 300 मतदाता/जनसंख्या दर्शाई गई है, जबकि कई अन्य वार्डों में यह संख्या लगभग 700 से 950 तक बताई गई है। याचिका में कहा गया है कि वार्डों में बिल्कुल समान जनसंख्या होना आवश्यक नहीं है, लेकिन इतनी बड़ी असमानता के लिए स्पष्ट एवं तार्किक आधार होना जरूरी है।
मतदाता आंकड़ों में अंतर का दावा
याचिका में उपलब्ध पूर्व मतदाता आंकड़ों और वार्डवार ड्राफ्ट सामग्री के आंकड़ों में भी अंतर होने का दावा किया गया है। इसके अनुसार नगर पालिका क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 18,453 बताई गई थी, जबकि वार्डवार ड्राफ्ट सामग्री में करीब 13,585 मतदाता दर्शाए गए। इस तरह करीब 4,868 मतदाताओं का अंतर बताया गया है। याचिका में इन आंकड़ों के सत्यापन और भौतिक जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
मकानवार रिकॉर्ड में विसंगतियों का आरोप
वार्ड परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका में कई मकान नंबरों एवं वार्डवार रिकॉर्ड में कथित विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार कुछ मकान नंबर अलग-अलग वार्डों में दर्ज होने, कुछ मकान नंबरों की प्रविष्टियां रिकॉर्ड में नहीं मिलने तथा एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग वार्डों में रखे जाने जैसी स्थिति सामने आई है।
याचिका में वार्ड 8 में मकान नंबर 816 को वार्ड 9 में दर्शाने, वार्ड 10 के मकान नंबर 1006 को वार्ड 11 में दर्ज करने तथा मकान नंबर 1219 में रहने वाले एक परिवार के सदस्यों को अलग-अलग वार्डों में विभाजित किए जाने सहित कई उदाहरण दिए गए हैं। वार्ड 12 और वार्ड 22 के रिकॉर्ड को लेकर भी कथित विसंगतियों का उल्लेख किया गया है।
भौगोलिक रूप से कॉम्पैक्ट वार्ड नहीं होने का मुद्दा
याचिका में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 10(3)(a) का हवाला देते हुए कहा गया है कि जहां तक व्यावहारिक हो, वार्ड भौगोलिक रूप से कॉम्पैक्ट होने चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मकानों की कथित गलत मैपिंग, परिवारों को अलग-अलग वार्डों में रखने और भौगोलिक रूप से असंगत क्षेत्रों को एक वार्ड में शामिल करने से वार्डों की भौगोलिक निरंतरता पर सवाल उठता है।
आपत्तियों पर प्रभावी विचार नहीं होने का आरोप
याचिका में बताया गया है कि 28 अप्रैल 2025 को वार्ड गठन का ड्राफ्ट प्रकाशित कर आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं तथा 29 अप्रैल से 5 मई 2025 तक आपत्तियां प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। याचिका के अनुसार वार्डवार आंकड़ों, जनसंख्या में अंतर, मकानों की मैपिंग और भौगोलिक स्थिति सहित विभिन्न बिंदुओं पर आपत्तियां प्रस्तुत की गईं, लेकिन उन पर प्रभावी एवं कारणयुक्त विचार नहीं किया गया।
याचिका में यह भी बताया गया है कि वार्ड गठन को लेकर 10 अप्रैल 2026 को प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पुनर्विचार के लिए प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है।
राजनीतिक प्रभाव की आशंका का भी उल्लेख
याचिका के आधारों में वार्ड गठन को लेकर कथित राजनीतिक दबाव की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। इसमें निष्पक्ष एवं तटस्थ तरीके से परिसीमन की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की गई है। हालांकि राजनीतिक दबाव से संबंधित आरोप याचिका में लगाए गए हैं और इनका अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा रिकॉर्ड एवं सुनवाई के आधार पर किया जाना है।
हाईकोर्ट से नए सिरे से परिसीमन की मांग
याचिका में हाईकोर्ट से 1 सितंबर 2025 की वार्ड गठन संबंधी अधिसूचना को निरस्त करने तथा राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 9 एवं 10 और राजस्थान नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 के अनुरूप नए सिरे से वार्ड परिसीमन कराने की मांग की गई है।
इसके साथ ही जनसंख्या एवं मतदाता आंकड़ों के पुनः सत्यापन, मकानवार रिकॉर्ड की जांच, वार्डों की भौगोलिक सीमाओं के पुनः परीक्षण, भौगोलिक रूप से कॉम्पैक्ट वार्डों के गठन तथा प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर नियमानुसार विचार करने की मांग की गई है।
नगरपालिका चुनाव की तैयारियों के बीच मामला महत्वपूर्ण
बीगोद नगर पालिका के वार्ड परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट में दायर यह याचिका आगामी नगर निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। याचिका में उठाए गए सवालों का संबंध वार्डों की सीमाओं, मतदाता एवं जनसंख्या आंकड़ों तथा परिसीमन की प्रक्रिया से है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड और सुनवाई के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
मामले में लगाए गए आरोप और आपत्तियां याचिका में किए गए दावों पर आधारित हैं। इन पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है।
