बुधवार से बदले दर्शन समय, 3 सितंबर तक गूंजेगा संकीर्तन; 4 सितंबर को 31 तोपों की गर्जना के बीच मनाया जाएगा गोविंददेवजी का जन्मोत्सव”

गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी की धूम, 4 सितंबर को 31 तोपों की गर्जना के बीच होगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

425 लीटर दूध से होगा ठाकुरजी का अभिषेक, गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां

अजय सिंह (चिंटू)

जयपुर-स्मार्ट हलचल|जयपुर के आराध्य देव श्री गोविंददेवजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में विशेष दर्शन व्यवस्था रहेगी। बुधवार से दर्शन समय में बदलाव के साथ 3 सितंबर तक प्रतिदिन अलग-अलग मंडलियों की ओर से संकीर्तन किया जाएगा। 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य आयोजन होगा।जन्माष्टमी के दिन मंगला झांकी सुबह 4 से 6:30 बजे, धूप झांकी 7 से 9 बजे, श्रृंगार झांकी 9:30 से 11:15 बजे, राजभोग 11:45 से दोपहर 1:15 बजे, ग्वाल झांकी शाम 4 से 6:30 बजे, संध्या झांकी 6:45 से 8:30 बजे और शयन झांकी रात 9:15 से 10:30 बजे तक होगी। इसके बाद रात में विशेष जन्मोत्सव दर्शन होंगे।

जन्मोत्सव से पहले ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, विशेष श्रृंगार और पीले वस्त्र धारण करवाने की परंपरा के अनुसार तैयारियां की जाएंगी। रात 12 बजे श्रीकृष्ण के प्राकट्य उत्सव के अवसर पर 31 तोपों की हवाई गर्जना और आतिशबाजी के साथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके बाद वेदपाठी पंडितों के वेदपाठ, शालिग्राम पूजन और पंचामृत अभिषेक के विशेष दर्शन होंगे। 31 तोपों की सलामी और पंचामृत अभिषेक गोविंददेवजी मंदिर के जन्माष्टमी आयोजन की प्रमुख परंपराओं में शामिल रहे हैं।

अभिषेक के लिए 425 लीटर दूध, 365 किलो दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा और 11 किलो शहद सेवा में अर्पित किया जाएगा। अभिषेक के बाद ठाकुर श्रीजी को पंजीरी, लड्डू, खिरसा और रबड़ी कुल्हड़ का विशेष भोग लगाया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से अपील की गई है कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु जूते-चप्पल और हेलमेट बाहर ही खोलकर आएं। कीमती सामान, बैग, थैला, लेडिज पर्स और ज्वेलरी साथ नहीं लाने की अपील की गई है। इसके अलावा फल, मिठाई, नारियल, लैपटॉप और कैमरा मंदिर में नहीं लाने को कहा गया है। ऐसे सामान को निर्धारित स्थान पर बाहर ही जमा कराना होगा।

जयपुर में 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचने की संभावना है, ऐसे में दर्शन व्यवस्था के साथ सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान रहेगा।