खाद के लिए सुबह 4 बजे से कतार, 500 किसानों में करीब 400 खाली हाथ लौटे

IFFCO बाजार में खाद को लेकर किसानों की बढ़ी परेशानी, करीब 150 टोकन ही बांटे गए, एक टोकन पर 2 नग खाद

नरेश कुरेडा

टोंक। स्मार्ट हलचल|रबी की फसल की बुवाई की तैयारी के बीच खाद को लेकर किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती नजर आ रही है। टोंक के IFFCO बाजार में खाद लेने के लिए किसान बुधवार सुबह करीब 4 बजे से ही पहुंचना शुरू हो गए। सुबह होते-होते खाद लेने वाले किसानों की लंबी कतार लग गई और किसानों की संख्या करीब 500 तक पहुंच गई।किसानों का कहना है कि रबी की फसल के लिए खाद की आवश्यकता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करने के बावजूद खाद नहीं मिल पा रही है। खाद लेने के लिए कई किसान अंधेरे में ही घरों से निकलकर IFFCO बाजार पहुंच गए और अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

करीब 150 टोकन ही बांटे गए

मौके पर किसानों के अनुसार करीब 150 टोकन ही वितरित किए गए। इसके अलावा एक टोकन पर केवल 2 नग खाद दिए जाने की बात सामने आई। इससे कतार में खड़े सैकड़ों किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

किसानों के मुताबिक करीब 500 किसान खाद लेने के लिए पहुंचे थे, लेकिन इनमें से लगभग 400 किसानों को बिना खाद लिए ही वापस लौटना पड़ा। कई किसान घंटों तक लाइन में खड़े रहे, लेकिन नंबर नहीं आने के कारण उन्हें निराश होकर वापस जाना पड़ा।

सुबह से इंतजार, फिर भी नहीं मिली खाद

किसानों का कहना है कि सुबह 4 बजे से लाइन में लगने के बाद भी यदि खाद नहीं मिले तो किसान आखिर कहां जाएं। रबी की फसल की बुवाई का समय नजदीक है और ऐसे में खाद की जरूरत बढ़ गई है। किसानों को डर है कि समय पर खाद नहीं मिलने से उनकी बुवाई प्रभावित हो सकती है।

किसानों ने मांग की है कि खाद वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए और किसानों की संख्या के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करवाई जाए। किसानों का कहना है कि टोकन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ खाद की आपूर्ति भी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले किसानों को खाली हाथ वापस नहीं लौटना पड़े।

किसानों का सवाल—जब मांग इतनी ज्यादा है तो पर्याप्त खाद कब आएगी?

IFFCO बाजार में सुबह से लगी लंबी कतार और बड़ी संख्या में किसानों के खाली हाथ लौटने से खाद की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते खाद की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि रबी की फसल के सीजन में किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।