भीलवाड़ा कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, धारा 138 के तहत दोषसिद्धि, प्रतिकर राशि अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास
(पंकज पोरवाल)
एक करोड़ का चेक बाउंस, सुयोजित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक दंपती समेत तीन दोषी
भीलवाड़ा ।स्मार्ट हलचल|एक करोड़ रुपए के चेक बाउंस से जुड़े करीब 12 साल पुराने मामले में भीलवाड़ा की विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण) संख्या-05 की अदालत ने सुयोजित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक अनिल भंवरलाल जैन व वैशाली अनिल जैन को दोषी माना है। अदालत ने तीनों को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दो साल के साधारण कारावास और 1.40 करोड़ रुपए प्रतिकर से दंडित किया। फैसला 19 अगस्त 2026 को सुनाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार कचौलिया ने बताया की मामला परिवादी ललित प्रसाद कालिया की ओर से वर्ष 2012 में दायर किया गया था। परिवादी का आरोप था कि बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपियों की ओर से 31 मई 2011 का एक करोड़ रुपए का चेक जारी किया गया। चेक को 30 नवंबर 2011 को बैंक में प्रस्तुत करने पर वह पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण अनादरित हो गया। इसके बाद 29 दिसंबर 2011 को कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपियों ने चेक को सुरक्षा के तौर पर दिए जाने और उसके दुरुपयोग का दावा किया था। उन्होंने बकाया राशि से भी इनकार किया। अदालत ने चेक पर अनिल जैन के हस्ताक्षर और कंपनी के खाते से जारी होने सहित साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत ने धारा 118 और 139 के तहत चेक धारक के पक्ष में बनी वैधानिक धारणा तथा आरोपियों की ओर से उसे प्रभावी ढंग से खंडित नहीं किए जाने को महत्वपूर्ण माना। इसके आधार पर तीनों को दोषसिद्ध किया गया। फैसले में अदालत ने कहा कि प्रतिकर की राशि अपील/रिवीजन की अवधि समाप्त होने के बाद परिवादी को दी जाएगी। प्रतिकर जमा नहीं करने पर आरोपियों को छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार कचौलिया एवं अधिवक्ता छोटूलाल माली ने पैरवी की। फैसला 19 अगस्त 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया गया।
