प्रो. बी.पी. सारस्वत ने दिया ‘लीड फ्रॉम द फ्रंट’ का संदेश, बोले—पहले गुरू, फिर कुलगुरु
कोटा।स्मार्ट हलचल|नेतृत्व केवल निर्देश देने का नाम नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वयं जिम्मेदारी संभालकर उदाहरण प्रस्तुत करने का नाम है। कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने सोमवार को इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए चल रही विश्वविद्यालय परीक्षाओं के दौरान स्वयं परीक्षा उड़नदस्ता दल की ड्यूटी संभाली और परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। कुलगुरु को स्वयं निरीक्षण करते देख परीक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और कार्मिकों में भी उत्साह नजर आया।
निरीक्षण के दौरान प्रो. सारस्वत ने परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं, अनुशासन, निगरानी और परीक्षा संचालन की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने परीक्षा ड्यूटी में तैनात अधिकारियों एवं कार्मिकों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और परीक्षा की शुचिता एवं पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया।
कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय में कार्य करते समय हमें सबसे पहले यह याद रखना चाहिए कि हम गुरू हैं और उसके बाद कुलगुरु या किसी अन्य प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी आती है। सभी डीन, प्रोफेसर और शिक्षक इसी भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी समान रूप से महत्वपूर्ण है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
पहली बार कुलगुरु ने संभाली उड़नदस्ता ड्यूटी
इस दौरान प्रो. डॉ. अनुकृति शर्मा भी कुलगुरु सारस्वत के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब किसी कार्यरत कुलगुरु ने स्वयं उड़नदस्ता दल की जिम्मेदारी संभालते हुए परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया है। उन्होंने प्रो. सारस्वत की इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि व्यस्त प्रशासनिक दायित्वों के बावजूद परीक्षा निरीक्षण के लिए समय निकालना सकारात्मक नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण है।
परीक्षा व्यवस्था से जुड़े केंद्र अधीक्षक प्रो. डॉ. सौरभ डालेदल और एएससी डॉ. प्रज्ञा धीर ने भी कुलगुरु की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि कुलगुरु का स्वयं परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर व्यवस्थाओं को देखना विश्वविद्यालय के शिक्षकों और परीक्षा ड्यूटी में लगे कार्मिकों के लिए प्रेरणादायी संदेश है।
