* सरसों, गेहूं, चना सहित रबी फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे किसान; निर्धारित कीमत 1350 रुपये, 1800 से 1900 रुपये तक मांगने का आरोप
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा।स्मार्ट हलचल|उनियारा उपखंड क्षेत्र सहित बनेठा उपतहसील क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई का समय नजदीक आते ही डीएपी खाद की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरसों, गेहूं, चना सहित अन्य रबी फसलों की तैयारी में जुटे किसान डीएपी खाद के लिए दुकानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने से समय पर बुवाई को लेकर संकट की स्थिति बन रही है। किसानों के अनुसार रबी फसलों की बुवाई के समय डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। ऐसे में समय पर खाद नहीं मिली तो बुवाई प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। किसान सुबह से खाद की दुकानों पर पहुंच रहे हैं और घंटों इंतजार के बाद भी कई बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
*बनेठा में चार-पांच दुकानों पर भी पर्याप्त उपलब्धता नहीं*
किसानों के अनुसार बनेठा क्षेत्र में खाद की करीब चार-पांच दुकानें हैं, लेकिन इन दुकानों पर डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। खाद आने की उम्मीद में किसान सुबह से दुकानों के बाहर पहुंच रहे हैं। कई किसान घंटों इंतजार करने के बाद बिना खाद लिए वापस लौटने को मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि जब कहीं डीएपी उपलब्ध होती है तो कुछ स्थानों पर निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की आशंका है।
*1350 रुपये निर्धारित कीमत, 1800-1900 रुपये तक मांगने का आरोप*
किसानों का कहना है कि डीएपी की निर्धारित कीमत करीब 1350 रुपये प्रति बोरी है। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर एक बोरी के लिए 1800 से 1900 रुपये तक मांगने के आरोप लगाए जा रहे हैं। किसानों ने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि खाद निर्धारित दर पर उपलब्ध नहीं होती और मजबूरी में अधिक कीमत चुकानी पड़ती है तो इसका सीधा असर उनकी खेती की लागत पर पड़ेगा। किसानों ने कृषि विभाग एवं प्रशासन से खाद की बिक्री व्यवस्था की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली की शिकायतों की जांच कराने की मांग की है।
*समय पर खाद नहीं मिली तो बुवाई पर पड़ेगा असर*
किसानों ने बताया कि सरसों, गेहूं और चना सहित रबी फसलों की बुवाई के समय खाद की जरूरत रहती है। खाद के लिए किसानों को लगातार दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि खाद की कमी का असर केवल खाद की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि बुवाई के समय पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। यदि समय पर डीएपी उपलब्ध नहीं हुई तो किसानों को बुवाई टालने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की मजबूरी हो सकती है। ऐसे में कृषि विभाग को क्षेत्र में खाद की वास्तविक मांग और उपलब्ध स्टॉक की समीक्षा कर तत्काल व्यवस्था करने की जरूरत है।
*प्रशासन से पर्याप्त आपूर्ति और पारदर्शी वितरण की मांग*
किसानों ने शासन-प्रशासन एवं कृषि विभाग से बनेठा क्षेत्र में डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक, बिक्री और वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि खाद की उपलब्धता और वितरण की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि उन्हें बार-बार दुकानों के चक्कर लगाने और घंटों इंतजार करने से राहत मिल सके। किसानों ने मांग की है कि रबी सीजन की जरूरत को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त डीएपी की आपूर्ति कराई जाए।
*कालाबाजारी की शिकायतों की जांच की मांग*
किसानों ने खाद की कथित कालाबाजारी तथा निर्धारित दर से अधिक कीमत मांगने की शिकायतों को गंभीरता से लेने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खाद की कमी के दौरान यदि कोई विक्रेता किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर अधिक कीमत वसूलता है तो कृषि विभाग को शिकायत की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बनेठा सहित पूरे उनियारा उपखंड क्षेत्र में डीएपी की उपलब्धता, निर्धारित दर पर बिक्री और स्टॉक की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि रबी फसलों की बुवाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना पड़े। अब किसानों की नजर कृषि विभाग की कार्रवाई पर है कि क्षेत्र में डीएपी की वास्तविक उपलब्धता कितनी है, वितरण व्यवस्था किस स्तर पर है और निर्धारित कीमत से अधिक राशि मांगने की शिकायतों पर विभाग क्या कदम उठाता है।
