बाढ़ से घिरे नेपाल को भारत की मदद, जयशंकर ने की समीक्षा

शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली। स्मार्ट हलचल|भारत ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए एक बार फिर संकट के समय नेपाल के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की अपनी ऐतिहासिक भूमिका को निभाया है। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की विभीषिका से निपटने के लिए भारत सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) सामग्री तथा जीवन रक्षक दवाओं की पहली खेप काठमांडू भेजी। इसके ठीक अगले ही दिन भारत ने वायुसेना के विशेष सैन्य विमान से 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी बड़ी किस्त भी रवाना कर दी है, ताकि मुश्किल दौर से गुजर रहे पड़ोसी देश को तत्काल राहत मिल सके।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी कूटनीतिक और प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक की। इसकी जानकारी देते हुए जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा नेपाल में बाढ़ की आपदा को लेकर विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम और काठमांडू व बीजिंग में हमारे राजदूतों के साथ समीक्षा बैठक की। बाढ़ प्रभावित इलाकों में सभी भारतीयों की स्थिति और उनकी सलामती का पता लगाने के लिए तेज़ी से कोशिशें की जा रही हैं।
उन्होंने आगे लिखा विदेश मंत्रालय इस मामले में अलग-अलग मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और प्रोजेक्ट अधिकारियों के साथ तालमेल बैठा रहा है। हम इस पहलू और राहत कार्यों, दोनों पर नेपाली पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि भारत नेपाली अधिकारियों के साथ निकट और निरंतर संपर्क में बना हुआ है और भारत चल रहे राहत प्रयासों का पुरजोर समर्थन करना जारी रखेगा।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़का राज पौडेल को भारत द्वारा भेजी गई सहायता सामग्री सौंपी गई है और 37.5 टन एचएडीआर सामग्री, दवाओं और खाद्य पैकेटों की दूसरी खेप भी विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंप दी गई है। दूतावास ने बताया कि उसके तमाम अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं और नेपाल में रहने वाले भारतीयों की सहायता एवं सुरक्षा के लिए इमरजेंसी नंबर जारी किए गए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को नेपाल में बचाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल में बाढ़ की स्थिति के लिए विदेश मंत्रालय में विशेष नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है।
भारत की ओर से यह त्वरित सहायता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के सुख-दुख को अपनी साझा नियति मानता है। चाहे वर्ष 2015 का विनाशकारी भूकंप रहा हो, 2019-20 में कोविड-19 महामारी हो या वर्तमान बाढ़ की आपदा, भारत ने हमेशा बिना किसी देरी के ‘बड़ा भाई’ होने का फर्ज निभाया है।