श्री गोपाल जी मंदिर में पारंपरिक लहरिया महोत्सव की रही धूम, एक ही रंग में रंगा नजर आया समूचा परिसर

भजनों की स्वरलहरियों पर जमकर थिरकीं महिला श्रद्धालु, पुष्प वर्षा के बीच ठाकुरजी के दरबार में दिखा भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम

नीरज मीणा

मंडावर। स्मार्ट हलचल/नगरपालिका शहर के हृदय स्थल गांधी चौक स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री गोपाल जी मंदिर में गुरुवार को गोपाल जी महिला मंडल के तत्वावधान में भव्य लहरिया महोत्सव श्रद्धा, उल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर समूचा मंदिर प्रांगण राजस्थानी लोक संस्कृति और भक्ति रस के अनूठे संगम का साक्षी बना। शहर के हॉस्पिटल रोड सहित आसपास की कॉलोनियों से पहुंचीं श्याम महिला भक्तों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं पारंपरिक एक जैसे लहरिया परिधान धारण कर मंदिर पहुंचीं। जिससे पूरा परिसर सतरंगी छटा और उत्सव के रंग में सराबोर दिखाई दिया।
महोत्सव का विधिवत शुभारंभ मंदिर में विराजमान भगवान श्री राधा-कृष्ण की नयनाभिराम प्रतिमाओं के विशेष मनोहारी शृंगार, विधि-विधान से पूजन और मनुहार के साथ हुआ। इसके उपरांत महिला मंडल द्वारा संगीतमय भजन-कीर्तन का क्रम शुरू किया गया। ढोलक और मंजीरों की मधुर थाप पर महिलाओं ने ठाकुरजी को रिझाने के लिए एक से बढ़कर एक भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों की भक्तिमय धुनों पर श्रद्धालु महिलाएं भावविभोर होकर जमकर थिरकीं और समूचा प्रांगण भक्ति नृत्य से गुंजायमान हो उठा। संकीर्तन के दौरान महिलाओं ने श्रद्धा और उल्लास व्यक्त करते हुए भगवान के विग्रह एवं उपस्थित भक्तों पर ताजे गुलाब के फूलों की मनोहारी पुष्प वर्षा की, जिससे पूरा वातावरण सुगंधित और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने “राधे राधे जपो चले आएंगे बिहारी”, “मीठे रस से भरयो री राधा रानी लागे”, “झूला झूले राधा प्यारी, संग में बांके बिहारी”, “सांवरिया ले चल परली पार, जहां विराजे श्री राधे सरकार”, “ओ कान्हा अब तो मुरली की मधुर सुना दो तान”, “मेरी लगी श्याम संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने”, “लहरिया ओढ़ राधा नाचे, कान्हा बजावे बांसुरिया” तथा “अधरं मधुरं वदनं मधुरं” जैसे प्रसिद्ध भजनों के माध्यम से अपने आराध्य के प्रति अनन्य प्रेम व श्रद्धा समर्पित की।
मंदिर महंत बृजमोहन दास शर्मा ने बताया कि भारतीय संस्कृति में सावन-भादो मास के दौरान मनाए जाने वाले पारंपरिक उत्सव आपसी सौहार्द, संस्कृति के संरक्षण और ईश्वर के प्रति समर्पण का सुंदर माध्यम हैं। कार्यक्रम के समापन पर भगवान श्री गोपाल जी को विशेष मिष्ठान एवं ऋतुफलों का भोग लगाकर महाआरती की गई। इसके पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को चरणामृत एवं प्रसाद वितरित किया गया, जहां बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने धर्म लाभ उठाया।