रक्षा बन्धन के स्नेह-सूत्र से हो पारिवारिक सामाजिक समरसता का संधान

_149 वीं समुत्कर्ष मासिक विचार गोष्ठी_

उदयपुर 27 अगस्त
स्मार्ट हलचल|राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पुनरुत्थान एवं वैचारिक चेतना को समर्पित शीर्षस्थ संस्था ‘समुत्कर्ष समिति’ के तत्वावधान में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर “रक्षाबंधन :भाई- बहन के रिश्ते से सामाजिक समरसता तक” विषयक 149 वीं समुत्कर्ष मासिक विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व भ्रातृभाव के उस अमूल्य अंकुर का नव-सिंचन है, जो काल की धारा के साथ सामाजिक समरसता के अक्षुण्ण एवं छायादार वटवृक्ष का रूप धारण कर लेता है।
वक्ताओं ने कहा कि कलाई पर बंधा सूक्ष्म रेशमी सूत्र मात्र भावुकता की एक क्षणिक प्रतिज्ञा नहीं, अपितु संपूर्ण सामाजिक चेतना को आत्मीयता, संवेदनशीलता और अखंडता के एक अविभाज्य सूत्र में पिरोने का वह समर्थ अनुष्ठान है, जहाँ विभेदों का अवसान होकर समरसता सुशोभित होती है।

वक्ताओं का अभिमत था कि श्रीमद्भागवत और लोक-परंपराओं में वर्णित द्रौपदी और श्रीकृष्ण का प्रसंग केवल रक्षा बन्धन नहीं, बल्कि सामाजिक संरक्षण का प्रतीक है। जब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांधा था, तो वह एक बहन का भ्रातृभाव था। बदले में श्रीकृष्ण ने चीर-हरण के समय द्रौपदी की लाज बचाकर यह सिद्ध किया कि सच्चा रक्षा बन्धन भाव समाज में स्त्री के सम्मान और सामाजिक न्याय की रक्षा का सबसे बड़ा स्तंभ है।
इस अवसर पर शिक्षाविद आर्य सत्यप्रिय ने कहा कि भ्रातृभाव से समरसता की ओर यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि वह वैचारिक सेतु है जो व्यक्तिगत संबंधों की संकुचित सीमाओं को तोड़कर संपूर्ण समाज को एक आत्मीय सूत्र में पिरोता है। जब रक्षाबंधन जैसे पर्व पर एक बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधती है, तो वह केवल एक व्यक्ति के प्रति रक्षा का वचन नहीं मांगती, बल्कि उसमें संपूर्ण समाज के प्रति सद्भाव और संरक्षण की भावना अंतर्निहित होती है।

विचार गोष्ठी में मंगलाचरण का पाठ शिक्षाविद् पीयूष दशोरा ने किया l उमंग पण्ड्या, कविता चौधरी, संदीप आमेटा, विद्यासागर, तरुण कुमार दाधीच ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।
समुत्कर्ष पत्रिका के उप संपादक गोविन्द शर्मा द्वारा ने ऑनलाइन जुड़े सभी संभागियों एवं वक्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि गोष्ठी का यह विमर्श समाज को एक नई वैचारिक दिशा देगा। समुत्कर्ष विचार गोष्ठी का संचालन शिवशंकर खण्डेलवाल ने किया ।
इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में तोषी सुखवाल, भावेश पटेल, लोकेश जोशी, सुदर्शना भट्ट, गोपाल माली, भूपेन्द्र उबाना, डॉ अनिल कुमार दशोरा, वीणा जोशी, पुष्कर सैनी, रामेश्वर प्रसाद शर्मा, चैनशंकर दशोरा तथा रश्मि मेहता भी सम्मिलित हुए।