स्मार्ट हलचल|अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रज़ा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से रविवार को सोसाइटी कार्यालय पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम देश की सभी महिलाओं को समर्पित होने के साथ-साथ निंबाहेड़ा की लगभग 100 वर्षीया बुजुर्ग महिला नारायणी बाई के अदम्य साहस और परिश्रम को सम्मानित करने के उद्देश्य से रखा गया।नारायणी बाई लंबे समय से निंबाहेड़ा की रज़ा कॉलोनी में निवास कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग सौ वर्ष की आयु में भी वे आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर रचका तैयार करती हैं और उसे अपनी ठेलागाड़ी में रखकर स्वयं ठेलागाड़ी चलाते हुए सावंतसिंह चौराहे तक पहुंचती हैं। वहां दिनभर रचका बेचने के बाद शाम को वापस अपने घर लौट जाती हैं।
आज के दौर में जहां युवा वर्ग भी कभी-कभी मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अपने कार्य का समय बदल लेते हैं, वहीं नारायणी बाई का हौसला और जज़्बा सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भीषण गर्मी, कड़ाके की सर्दी या तेज बारिश—किसी भी परिस्थिति में उन्होंने अपने रोज़मर्रा के कार्य में कभी विराम नहीं दिया। प्रतिदिन सुबह लगभग पांच बजे ठेलागाड़ी में सामान लेकर निकलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
नारायणी बाई के इसी अदम्य साहस और आत्मनिर्भरता को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में रज़ा कॉलोनी सहित निंबाहेड़ा क्षेत्र की कई महिलाओं और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण कर नारायणी बाई का सम्मान किया और उनके दीर्घायु जीवन तथा स्वास्थ्य की कामना की।
इस अवसर पर रज़ा एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद फारूक ने सोसाइटी की ओर से नारायणी बाई को विजय स्तम्भ की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में सोसाइटी के सभी सदस्य भी मौजूद रहे और सभी ने उनके जज़्बे को सलाम किया।
कार्यक्रम के दौरान आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का भी अनूठा दृश्य देखने को मिला। विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता ने देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक एकता की भावना को साकार रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आमिर अनवर, अहमद खान, राशिद खान, रमजान खान शबनम खान, अनीस परवीन, रुखसार खान रईसा बी इत्यादि मौजूद रहे।
