15 हजार रुपये के इनामी आरोपी सहित दो मुल्जिम पुलिस गिरफ्त में, तकनीकी संसाधनों और करीब 800 किलोमीटर तक लगातार तलाश के बाद मिली सफलता
नीरज मीणा
मंडावर। स्मार्ट हलचल/थाना मंडावर क्षेत्र में ग्राम खेड़ली कला के जंगल में बाजरे की खड़ी फसल के बीच मिले युवक के शव के मामले में मंडावर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अज्ञात ब्लाइंड मर्डर का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक आरोपी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आदतन अपराधी एवं हिस्ट्रीशीटर है तथा उस पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी संसाधनों, साइबर सेल की सहायता, सीसीटीवी फुटेज एवं मुखबिर तंत्र का सहारा लिया।
जिला पुलिस दौसा की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक जयपुर रेंज जयपुर श्री राहुल प्रकाश (आईपीएस) एवं जिला पुलिस अधीक्षक दौसा श्री पीयूष दीक्षित (आईपीएस) के निर्देशन में की गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना मंडावर पुलिस की विशेष टीम ने दिन-रात मेहनत करते हुए हत्या की वारदात का पर्दाफाश किया और आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।
जंगल में बाजरे की फसल के बीच मिला था शव
पुलिस के अनुसार 15 अगस्त 2026 को थाना मंडावर क्षेत्र के ग्राम खेड़ली कला के जंगल में बाजरे की खड़ी फसल के बीच एक युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। मृतक की पहचान राहुल उर्फ भानू मीना के रूप में हुई। प्रारंभिक तौर पर मामला अज्ञात हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की।
घटनास्थल सुनसान जंगल एवं फसल के बीच होने के कारण पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करने के साथ-साथ हत्या में शामिल आरोपियों तक पहुंचना था। पुलिस के अनुसार घटनास्थल के आसपास से आरोपियों की पहचान में मदद करने वाले पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिल रहे थे। मौके पर मृतक की पहचान से संबंधित दस्तावेज, मोबाइल सहित अन्य महत्वपूर्ण सामग्री भी उपलब्ध नहीं थी।
इसके बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया और हत्या के संभावित कारणों तथा मृतक की गतिविधियों से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाना शुरू किया।
दो दिन पहले हुआ था विवाद, जांच की दिशा बदली
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि मृतक राहुल उर्फ भानू मीना का घटना से करीब दो दिन पूर्व चौतराम मीना निवासी खातिपुरा के साथ कहासुनी एवं झगड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार विवाद के दौरान मृतक को धमकी दिए जाने की जानकारी भी सामने आई।
इस जानकारी के बाद पुलिस ने विवाद से जुड़े लोगों, उनके संपर्कों और घटनाक्रम के बाद उनकी गतिविधियों को जांच के दायरे में लिया। पुलिस ने संभावित आरोपियों की तलाश के साथ-साथ मृतक के परिचितों और घटनास्थल से जुड़े संदिग्ध लोगों से पूछताछ की।
शव को छिपाने का प्रयास
जांच में पुलिस के सामने यह भी आया कि हत्या के बाद शव को ऐसी जगह छिपाने का प्रयास किया गया, जहां तत्काल किसी की नजर न पड़े। पुलिस के अनुसार मृतक का शव मुख्य घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर खेड़ली कला क्षेत्र में बाजरे की फसल के बीच छिपाया गया था।
सुनसान जंगल एवं खेतों का क्षेत्र होने के कारण पुलिस के सामने चुनौती यह थी कि वारदात के बाद आरोपी किस दिशा में गए और शव को किस प्रकार वहां तक पहुंचाया गया। पुलिस ने घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए संभावित रास्तों एवं संदिग्ध गतिविधियों की जांच की।
करीब 800 किलोमीटर तक सुराग तलाशती रही पुलिस
ब्लाइंड मर्डर होने के कारण पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान करना आसान नहीं था। पुलिस टीम ने तकनीकी संसाधनों की मदद से विभिन्न पहलुओं पर जांच की। पुलिस के अनुसार लगातार प्रयास करते हुए टीम ने करीब 800 किलोमीटर तक सुराग तलाशे और संदिग्ध गतिविधियों का तकनीकी विश्लेषण किया।
जांच के दौरान साइबर सेल की टीम ने तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। पुलिस द्वारा प्राप्त सुरागों को आपस में जोड़कर संदिग्धों की पहचान की गई और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई।
लगातार निगरानी एवं अनुसंधान के बाद पुलिस को सफलता मिली और हत्या के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
15 हजार रुपये का इनामी और हिस्ट्रीशीटर आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में सुरेश उर्फ सूरज मीना पुत्र अर्जुन उर्फ बोना, उम्र 56 वर्ष, निवासी खेड़ली, थाना खेड़ली, जिला अलवर शामिल है। पुलिस प्रेस नोट में सुरेश उर्फ सूरज को थाना खेड़ली जिला अलवर का हिस्ट्रीशीटर एवं आदतन अपराधी बताया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में हत्या, मारपीट, आर्म्स एक्ट सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रेस नोट में उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों में थाना खेड़ली, थाना मंडावर तथा अन्य थाना क्षेत्रों के प्रकरणों का उल्लेख किया गया है। इसी आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते पुलिस की नजर इस आरोपी पर पहले से थी और उसकी गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
दूसरे गिरफ्तार आरोपी की पहचान शेरसिंह उर्फ शेरू पुत्र रामसिंह मीना, उम्र 19 वर्ष, निवासी खेड़ली, थाना खेड़ली, जिला अलवर के रूप में बताई गई है।
महिला की भूमिका की भी जांच
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार मामले की जांच में एक महिला की भूमिका का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस द्वारा पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात से पहले और बाद में कौन-कौन लोग आरोपियों के संपर्क में थे तथा हत्या की घटना में किसकी क्या भूमिका रही।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच एवं कानूनी कार्रवाई जारी है।
पुराने आपराधिक मामलों का भी रिकॉर्ड
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी सुरेश उर्फ सूरज मीना के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की गई। प्रेस नोट में उसके खिलाफ विभिन्न वर्षों में दर्ज कई प्रकरणों का उल्लेख किया गया है। इनमें हत्या, मारपीट, आर्म्स एक्ट सहित गंभीर धाराओं से जुड़े मामले शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद जांच टीम ने उसके पुराने संपर्कों और गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा बनाया। इससे वर्तमान वारदात की कड़ियों को जोड़ने में पुलिस को मदद मिली।
विशेष टीम ने संभाली जांच की कमान
ब्लाइंड मर्डर के खुलासे के लिए थाना मंडावर पुलिस की विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने से लेकर तकनीकी साक्ष्य जुटाने, संदिग्धों की पहचान करने और संभावित ठिकानों पर दबिश देने तक लगातार काम किया।
विशेष टीम में थाना मंडावर के थानाधिकारी सहित पुलिसकर्मी, साइबर सेल से जुड़े कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न थानों के पुलिसकर्मी शामिल रहे। प्रेस नोट में कुल 17 पुलिसकर्मियों के नाम विशेष टीम के सदस्यों के रूप में दर्ज किए गए हैं।
टीम में थाना मंडावर, सालमपुर, महवा, सिकराय, बालाहेड़ी सहित विभिन्न थाना क्षेत्रों के पुलिसकर्मी शामिल रहे। पुलिस टीम ने आपसी समन्वय के साथ जांच को आगे बढ़ाया।
तकनीकी जांच बनी अहम कड़ी
मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तकनीकी जांच की रही। घटनास्थल से प्रत्यक्ष रूप से आरोपियों की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस ने तकनीकी संसाधनों का सहारा लिया। साइबर सेल की मदद से उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण किया गया और संदिग्धों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया।
पुलिस ने आसपास के संभावित क्षेत्रों में सीसीटीवी फुटेज खंगाले और संदिग्धों की आवाजाही से जुड़े सुराग जुटाए। इन सुरागों को घटनाक्रम से जोड़कर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस की लगातार मेहनत से हुआ खुलासा
हत्या के बाद आरोपी इस बात को लेकर आश्वस्त रहे होंगे कि सुनसान जंगल एवं बाजरे की फसल के बीच शव छिपाने से वारदात का सुराग मिलना मुश्किल होगा, लेकिन पुलिस टीम ने लगातार जांच करते हुए एक-एक कड़ी जोड़कर मामले को सुलझाया।
करीब 800 किलोमीटर तक सुराग तलाशने, तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करने और अलग-अलग स्थानों पर जांच करने के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। इस कार्रवाई से मंडावर क्षेत्र में हुए अज्ञात ब्लाइंड मर्डर का पर्दाफाश हुआ है।
आगे की जांच जारी
पुलिस द्वारा गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्या के पीछे वास्तविक कारण, वारदात की पूरी परिस्थितियों, इसमें शामिल अन्य लोगों तथा हत्या के बाद शव को छिपाने की पूरी प्रक्रिया के संबंध में जानकारी जुटा रही है।
जिला पुलिस की ओर से बताया गया है कि मामले में नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी।
