सीसीटीवी में कैद वारदातें, फिर भी अपराधी बेखौफ!

मंगलसूत्र झपटमारी से लेकर खजूरी शराब गोदाम चोरी तक नहीं पहुंची पुलिस की पकड़; कैमरों में सुराग होने के बावजूद खुलासे का इंतजार, शकरगढ़ पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

अलकेश पारीक

शकरगढ़।स्मार्ट हलचल|क्षेत्र में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं और उनके लंबित खुलासों के बीच अब शकरगढ़ पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। खास बात यह है कि दो अलग-अलग वारदातों में सीसीटीवी कैमरे पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग उपलब्ध करा रहे हैं, इसके बावजूद दोनों मामलों में पुलिस अब तक आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है।एक तरफ 9 अगस्त को हाईवे 148डी पर महिला के गले से मंगलसूत्र झपटने की वारदात हुई, वहीं दूसरी ओर खजूरी स्थित शराब गोदाम में चोरी की घटना सामने आई। दोनों घटनाओं को लेकर सीसीटीवी फुटेज की बात सामने आई है। इसके बावजूद लंबे समय बाद भी पुलिस की कार्रवाई का अंतिम परिणाम सामने नहीं आने से लोगों में चर्चा है कि आखिर जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है।

पहला मामला: दिनदहाड़े मंगलसूत्र झपटमारी

9 अगस्त को हाईवे 148डी पर दुकान पर बैठी महिला के गले से तीन अज्ञात बदमाश मंगलसूत्र झपटकर फरार हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने टोल प्लाजा से लेकर जहाजपुर और बूंदी की ओर जाने वाले रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने की कार्रवाई भी की।

लेकिन अब कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

सवाल यह है कि जब वारदात के बाद संभावित भागने वाले रास्तों के सीसीटीवी फुटेज तक पुलिस पहुंच चुकी है और संदिग्धों की गतिविधियां कैमरों में तलाशने की कोशिश की जा रही है, तो फिर जांच को गिरफ्तारी और बरामदगी तक पहुंचने में इतना समय क्यों लग रहा है?

दूसरा मामला: खजूरी शराब गोदाम में चोरी

इसी तरह खजूरी स्थित शराब गोदाम में हुई चोरी का मामला भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। इस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां कैद होने की बात सामने आई है, लेकिन इसके बावजूद मामले के खुलासे का इंतजार बना हुआ है।

दोनों मामलों में एक समान बात सामने आती है—वारदात हुई, कैमरों में सुराग मिले और पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

सीसीटीवी आखिर किस काम का?

आज के दौर में अपराध की जांच में सीसीटीवी पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी साधनों में से एक है। आरोपी किस रास्ते से आया, किस वाहन का इस्तेमाल हुआ, वारदात के बाद किस दिशा में गया—इन तमाम सवालों के जवाब कैमरों की रिकॉर्डिंग से मिल सकते हैं।

ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि मंगलसूत्र झपटमारी और शराब गोदाम चोरी जैसे मामलों में सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद खुलासा नहीं हो पा रहा है, तो फिर पुलिस के तकनीकी तंत्र, मुखबिर तंत्र और जांच की गति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

एक के बाद एक वारदात, खुलासे का इंतजार

क्षेत्र में चोरी, झपटमारी और मारपीट जैसी घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है। अपराध के बाद पुलिस द्वारा जांच शुरू करना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि जांच को तार्किक परिणाम तक पहुंचाया जाए।

केवल एफआईआर दर्ज होना और सीसीटीवी फुटेज खंगालना पुलिसिंग की सफलता नहीं मानी जा सकती। सफलता तब मानी जाएगी जब अपराधी पकड़े जाएं, माल बरामद हो और पीड़ितों को न्याय मिले।

मंगलसूत्र झपटमारी और खजूरी शराब गोदाम चोरी के मामलों में लंबे समय से खुलासे का इंतजार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

अब वरिष्ठ अधिकारियों को लेना होगा संज्ञान

इन मामलों में अब जरूरत है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जांच की प्रगति की समीक्षा करें। सीसीटीवी फुटेज में मिले सुरागों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की पहचान के लिए क्या प्रयास किए गए और आरोपियों तक पहुंचने में क्या बाधा आ रही है—इन सवालों के जवाब सामने आने चाहिए।

आमजन को पुलिस से सिर्फ कार्रवाई का आश्वासन नहीं, बल्कि कार्रवाई का परिणाम चाहिए।

क्योंकि सवाल सिर्फ दो वारदातों का नहीं है—सवाल यह है कि अगर कैमरों में कैद अपराधी भी पुलिस की पकड़ से बाहर रहेंगे, तो क्षेत्र में अपराधियों के मन में कानून का कितना भय रह जाएगा?

शकरगढ़ पुलिस के सामने अब सीधी चुनौती

सीसीटीवी के सुराग को गिरफ्तारी तक पहुंचाना, चोरी का माल बरामद करना और लंबित वारदातों का जल्द खुलासा करना।

वरना कैमरे तो वारदातों की तस्वीर कैद कर रहे हैं, लेकिन पुलिस की जांच कब अपराधियों तक पहुंचेगी—यह सवाल लगातार बड़ा होता जाएगा।