किसान महापंचायत: निलंबित खाद विक्रेता के लाइसेंस की सार्वजनिक सूचना नहीं होने से किसान परेशान

23 अगस्त को डीएपी के नाम पर यूरिया का बिल काटने और निर्धारित दर से अधिक राशि लेने के आरोप-कृषि विभाग की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/जयपुर। स्मार्ट हलचल|जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कृषि विभाग द्वारा 27 अगस्त से एफएफएस (FFS) एप्प के माध्यम से उर्वरक वितरण व्यवस्था शुरू किए जाने के बाद नानेर स्थित मैसर्स जैन खाद बीज भंडार पर पहुंचे किसानों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब दुकानदार ने अपना लाइसेंस निलंबित होने की जानकारी दी।
जानकारी के अनुसार डोडवाड़ी निवासी किसान गोपीलाल यूरिया के 20 बैग, रामलाल 20 बैग, छोटू 20 बैग, धर्मराज 5 बैग तथा महिला कृषक गीता देवी 18 बैग यूरिया लेने के लिए मैसर्स जैन खाद बीज भंडार, नानेर पहुंचे थे। दुकानदार द्वारा उन्हें बताया गया कि उसका लाइसेंस निलंबित हो चुका है। किसानों द्वारा निलंबन आदेश की प्रतिलिपि मांगे जाने पर व्यापारी ने आदेश की प्रति उपलब्ध कराई।
*डीएपी के नाम पर अधिक राशि लेने और यूरिया का बिल काटने का आरोप*
किसानों के अनुसार 23 अगस्त को सत्यनारायण नामक किसान डीएपी उर्वरक लेने के लिए उक्त प्रतिष्ठान पर गया था। आरोप है कि दुकानदार ने किसान को डीएपी का एक बैग 2,005 रुपये में दिया। इस दौरान किसान द्वारा राशि देने का वीडियो भी बनाए जाने की बात सामने आई है। वीडियो में किसान द्वारा 500-500 रुपये के नोट व्यापारी को दिए जाते दिखाई देने का दावा किया गया है। वहीं, आरोप है कि व्यापारी ने पास मशीन के माध्यम से किसान का अंगूठा एवं ओटीपी लेकर यूरिया उर्वरक वितरण का बिल काट दिया, जबकि किसान का कहना था कि उसने डीएपी उर्वरक खरीदा था। मामले की शिकायत के बाद कृषि अधिकारी मुकेश गैना द्वारा जांच किए जाने तथा शिकायत सही पाए जाने की बात किसानों की ओर से कही गई है। बताया गया कि इसी मामले में कृषि विभाग द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 की धारा 31(1)(b) के तहत कार्रवाई की गई।
*निलंबित लाइसेंस के बाद स्टॉक वितरण को लेकर उठे सवाल*
किसान महापंचायत से जुड़े लोगों का कहना है कि उर्वरक नियंत्रण व्यवस्था के तहत लाइसेंस संबंधी कार्रवाई होने के बाद बचे हुए उर्वरक स्टॉक के निस्तारण को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था है। किसानों का सवाल है कि यदि प्रतिष्ठान पर उर्वरक का स्टॉक मौजूद है तो कृषि विभाग की निगरानी में नियमानुसार उसका निस्तारण क्यों नहीं कराया जा रहा है। किसानों का कहना है कि कृषि पर्यवेक्षक की निगरानी में एफएफएस एप पर किसानों की मांग के अनुसार उपलब्ध स्टॉक का वितरण कराया जाना चाहिए, ताकि निलंबित लाइसेंस का खामियाजा उन किसानों को नहीं भुगतना पड़े, जिन्हें यूरिया की आवश्यकता है।
*25 अगस्त को निलंबन की सार्वजनिक सूचना क्यों नहीं?*
किसान महापंचायत के युवा प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर चौधरी ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि संबंधित विक्रेता का लाइसेंस 25 अगस्त को निलंबित किया गया था, तो इसकी सार्वजनिक सूचना किसानों के लिए उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। किसानों का आरोप है कि उन्हें दुकान पर पहुंचने के बाद ही लाइसेंस निलंबित होने की जानकारी मिल रही है। किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों से सवाल किया है कि निलंबित प्रतिष्ठान के संबंध में समय रहते सार्वजनिक सूचना क्यों जारी नहीं की गई? किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उपलब्ध स्टॉक को किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है? वहीं, कथित अनियमितताओं की शिकायत सही पाए जाने के बावजूद संबंधित प्रतिष्ठान के लाइसेंस को निलंबित रखने के बजाय आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है? किसान महापंचायत ने कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सहित संबंधित अधिकारियों से मामले में पारदर्शिता बरतने, किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। साथ ही किसानों का कहना है कि यदि जांच में किसानों से अधिक राशि वसूलने अथवा गलत उर्वरक का बिल काटने जैसे आरोप प्रमाणित होते हैं तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। किसानों ने मांग की है कि उर्वरक वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए विभागीय अधिकारियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि जरूरत के समय किसानों को खाद के लिए परेशान नहीं होना पड़े।