शाहपुरा जिला अस्पताल: नया भवन तैयार, मगर मरीज आज भी पुराने जर्जर भवन में भटक रहे हैं

राजेन्द्र खटीक

शाहपुरा-स्मार्ट हलचल|शाहपुरा जिला अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। नया भवन एक साल से तैयार होने के बावजूद उद्घाटन का इंतज़ार कर रहा है, जबकि पुराने भवन में भीड़, लंबी लाइनें और बुनियादी सुविधाओं की कमी से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मरीजों की दिनचर्या: इलाज नहीं, भूलभुलैया में भटकना
मरीजों को अस्पताल आने पर कई चरणों से गुजरना पड़ता है:
– पुराने भवन में भर्ती की लाइन: मरीज सबसे पहले पुराने भवन में भर्ती के लिए लाइन में लगते हैं।
– डॉक्टर की जाँच की लाइन: भर्ती के बाद डॉक्टर से जाँच के लिए फिर से लाइन।
– जाँच का समय: जाँच अक्सर दोपहर 1 बजे के बाद ही मिलती है।
– कमरा आवंटन: जाँच के बाद 35 नंबर कमरे जैसे वार्डों में बेड के लिए फिर लाइन।
– दवाइयाँ लेने की लाइन: पास की खिड़की से दवाइयाँ लेने के लिए अलग लाइन।
– नए भवन में फिर जाँच: दवाइयाँ लेकर नए भवन में बीपी, वेट और अन्य जाँच के लिए 1 नंबर कमरे में फिर लाइन।
– बेड और नर्सिंग की कमी:एक बेड पर तीन मरीज, ड्रिप चालू कराने के लिए बार-बार अनुरोध, नर्सिंग स्टाफ की अनुपस्थिति।
– डिस्चार्ज की प्रक्रिया:स्वस्थ होने से पहले ही छुट्टी, छुट्टी के लिए अनेक लाइनों से गुजरना।

इस पूरी प्रक्रिया में मरीज और उनके परिजन 3–4 घंटे इधर-उधर भटकते रहते हैं, जिससे बीमार व्यक्ति और अधिक कमजोर हो जाता है।
नया भवन तैयार, मगर उद्घाटन का इंतज़ार
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल का नया भवन एक साल पहले ही तैयार हो गया था, लेकिन आज तक इसका उद्घाटन नहीं हुआ है। भवन में जाले जम गए हैं, और यह मंत्री या अधिकारियों के उद्घाटन का इंतज़ार कर रहा है। इस देरी के कारण मरीजों को पुराने, जर्जर भवन में ही इलाज लेना पड़ रहा है
ऐसी स्थिति अन्य जिलों में भी देखी गई है, जहाँ नए अस्पताल भवन बनकर तैयार होने के बाद भी विभागीय हैंडओवर, फंडिंग या औपचारिकताओं के कारण मरीजों को पुराने भवन में ही इलाज कराना पड़ रहा है।
जनता की माँग: तत्काल उद्घाटन और व्यवस्था सुधार
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों की माँग है कि:
– नए भवन का तत्काल उद्घाटन किया जाए।
– पुराने भवन में भीड़ प्रबंधन और लाइन व्यवस्था सुधारी जाए।
– नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
– एक बेड पर एक मरीज की व्यवस्था हो।
– डिस्चार्ज प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता
इस मामले में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। नए भवन का उद्घाटन कर मरीजों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान की जानी चाहिए, और पुराने भवन में भी व्यवस्थाओं में सुधार किया जाना चाहिए।