महेन्द्र नागौरी
कहीं कचरे के ढेर, कहीं गंदे शौचालय… सवाल यह कि 680 सफाईकर्मी मैदान में हैं तो शहर में गंदगी क्यों?
संवेदक को नोटिस, कचरा स्टैंड पर सख्ती; 18 वार्डों में चला विशेष सफाई अभियान
भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|नगर निगम में सफाई व्यवस्था को लेकर अब कागजी दावों के बजाय धरातल की हकीकत जांचने की कवायद तेज हो गई है। निगम आयुक्त यादव के वार्ड नंबर 1 और 70 के औचक निरीक्षण ने एक तरफ सफाई व्यवस्था की कुछ तस्वीरें संतोषजनक बताईं, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक शौचालय और कचरा स्टैंड पर मिली गंदगी ने व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर दिए।
औचक निरीक्षण के दौरान पातोला महादेव रोड स्थित सार्वजनिक शौचालय में मुख्य गेट, स्टोर, शौचालय और पानी के टैंक में कांजी और गंदगी मिली। आयुक्त ने तत्काल संबंधित संवेदक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। सवाल यह है कि जिस सफाई व्यवस्था की निगरानी नियमित रूप से होनी चाहिए, वहां गंदगी निरीक्षण के बाद ही क्यों दिखाई देती है?
680 सफाईकर्मी फिर भी गंदगी क्यों?
नगर निगम के 70 वार्डों में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत 680 सफाई कर्मचारियों की टीम 18 वार्डों में सड़कों, नालियों और खाली भूखंडों की सफाई में जुटी है।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर 680 सफाईकर्मी मैदान में हैं तो शहर के कई हिस्सों में गंदगी और कचरे की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?
क्या समस्या कर्मचारियों की कमी है, या फिर मॉनिटरिंग और जवाबदेही की कमी?
कचरा उठाने वाला ही कचरा फैला दे तो किसकी जिम्मेदारी?
लक्ष्मीपुरा कचरा स्टैंड पर नागरिकों ने शिकायत की कि ऑटो टिपर द्वारा कचरा निर्धारित जगह पर डालने के बजाय इधर-उधर फैला दिया जाता है। शिकायत मिलते ही आयुक्त खुद मौके पर पहुंचे।
उन्होंने स्वास्थ्य निरीक्षक और ऑटो टिपर सुपरवाइजर को निर्देश दिए कि कचरा सिर्फ चिन्हित स्थान पर ही खाली करवाया जाए। साथ ही कचरा स्टैंड की तत्काल सफाई के निर्देश दिए।
यह मामला एक और बड़ा सवाल खड़ा करता है—जिस व्यवस्था का काम शहर को साफ रखना है, उसी व्यवस्था की लापरवाही से कचरा सड़क पर फैल रहा है तो निगरानी तंत्र आखिर कर क्या रहा था?
मेले की व्यवस्था भी जांची
वार्ड नंबर 1 के पुर क्षेत्र में बाबा रामदेव मंदिर मेले की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया। सड़कों की साइड की पटरियों की जेसीबी से सफाई कराने के निर्देश दिए गए। नालियों और खाली भूखंडों में जमा कचरे की नियमित सफाई के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
नागरिक बोले—सफाईकर्मी नियमित आते हैं
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने स्थानीय नागरिकों से सीधे फीडबैक लिया। नागरिकों ने सफाई कर्मचारियों के नियमित आने और सफाई व्यवस्था को संतोषजनक बताया। इससे साफ है कि जहां निगरानी और कर्मचारी सक्रिय हैं, वहां व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
अब असली परीक्षा औचक निरीक्षण के बाद:-
आयुक्त के औचक निरीक्षण और कार्रवाई से निगम की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी।
क्या नोटिस के बाद संवेदक की व्यवस्था सुधरेगी?
क्या कचरा स्टैंड दोबारा कचरे का अड्डा नहीं बनेगा?
क्या खाली भूखंडों और नालियों की नियमित सफाई होगी?
क्या 680 सफाईकर्मियों की मेहनत का असर पूरे शहर में दिखाई देगा?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या सफाई व्यवस्था आयुक्त के निरीक्षण तक सीमित रहेगी या रोजाना मॉनिटरिंग होगी?
शहर को सिर्फ विशेष सफाई अभियान नहीं, स्थायी सफाई व्यवस्था चाहिए। निगम प्रशासन की कार्रवाई तभी सफल मानी जाएगी, जब औचक निरीक्षण खत्म होने के बाद भी सड़कें, नालियां और सार्वजनिक स्थल उसी तरह साफ नजर आएं।
