पंकज पोरवाल
नामांकन के अंतिम दिन अधिकृत सिंबल समय पर नहीं पहुंचने का आरोप, पीसीसी सदस्य मनोज ने डोटासरा और स्थानीय जिम्मेदारों पर उठाए सवाल
भीलवाड़ा । स्मार्ट हलचल|नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के चुनावी मैदान से बाहर होने का मामला अब पार्टी के भीतर ही बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन कांग्रेस प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल समय पर निर्वाचन अधिकारियों तक नहीं पहुंचने के आरोपों ने संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीसीसी सदस्य मनोज ने पूरे घटनाक्रम को कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा तथा स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार महेश सोनी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पीसीसी सदस्य मनोज ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
*सिंबल भेजने की व्यवस्था पर उठे सवाल*
मनोज का आरोप है कि नामांकन की अंतिम समय-सीमा के दौरान कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल संबंधित निर्वाचन अधिकारियों तक समय पर नहीं पहुंच पाए। इसके चलते कई प्रत्याशी चुनावी प्रक्रिया से ही बाहर हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी की ओर से सिंबल समय पर भेज दिए गए थे तो वे निर्वाचन अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंचे और यदि भेजने में देरी हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि इसे महज तकनीकी चूक बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रत्याशियों ने चुनाव की तैयारी में समय और संसाधन लगाए थे तथा पार्टी से अधिकृत होने के बाद उन्हें चुनाव लड़ने का पूरा भरोसा था। ऐसे में अंतिम समय में नामांकन प्रक्रिया से बाहर होना गंभीर संगठनात्मक मामला है।
*डोटासरा पर भेदभाव के आरोप*
मनोज ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव किए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि यदि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी संगठनात्मक स्तर की चूक के कारण चुनाव नहीं लड़ पाए हैं तो पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव की तैयारी कर रहे कार्यकर्ताओं को टिकट मिलने के बाद मैदान में उतरने का अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन नामांकन प्रक्रिया में ही उनके बाहर हो जाने से कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।
*राष्ट्रीय नेतृत्व तक मामला ले जाने की तैयारी*
मनोज ने कहा कि वे इस पूरे प्रकरण को कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग करने की बात कही है। उनका कहना है कि प्रदेश और स्थानीय स्तर पर पूरे घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए तथा यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि 17 प्रत्याशियों के सिंबल आखिर समय पर निर्वाचन अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंच सके।
*70 वार्डों की प्रक्रिया की भी जांच की मांग*
मनोज ने नगर निगम के सभी 70 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन और नामांकन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच से यह सामने आना चाहिए कि सिंबल भेजने की व्यवस्था में कहां चूक हुई, किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने दोहराया कि पार्टी के लिए वर्षों से मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का अवसर ही नहीं मिल पाना गंभीर विषय है। ऐसे मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
