गुरला वन भूमि पर कथित अतिक्रमण मामले में NGT में जनहित याचिका पेश करने की तैयारी — कथित पर्यावरणीय क्षति के लिए ‘Polluter Pays Principle’ लागू करने की मांग

गुरला वन भूमि पर कथित अतिक्रमण मामले में NGT में जनहित याचिका पेश करने की तैयारी — कथित पर्यावरणीय क्षति के लिए ‘Polluter Pays Principle’ लागू करने की मांग

भीलवाड़ा/गुरला।स्मार्ट हलचल|ग्राम पंचायत गुरला क्षेत्र में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण एवं वन भूमि पर पट्टा जारी किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष जनहित याचिका पेश करने की तैयारी की जा रही है।
प्रकरण से संबंधित उपलब्ध सरकारी पत्र में क्षेत्रीय वन अधिकारी, भीलवाड़ा द्वारा ग्राम पंचायत गुरला से आराजी संख्या 2246 में जारी पट्टे के संबंध में रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है। पत्र में विभागीय मौका निरीक्षण एवं रिकॉर्ड की जांच के बाद संबंधित खसरे को वन विभाग के नाम दर्ज एवं वनभूमि बताया गया है तथा ग्राम पंचायत से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि वनभूमि पर किस आधार एवं किस नियम के तहत पट्टा जारी किया गया।
इस मामले में कुलदीप शर्मा के विरुद्ध कथित अतिक्रमण/निर्माण एवं उससे होने वाली संभावित पर्यावरणीय क्षति की स्वतंत्र जांच की मांग NGT के समक्ष प्रस्तावित की जाएगी।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि वन भूमि पर अवैध कब्जे, निर्माण अथवा अन्य गतिविधियों से पर्यावरण एवं वन क्षेत्र को क्षति पहुंची है, तो याचिका में (प्रदूषक भुगतान सिद्धांत) लागू करते हुए पर्यावरणीय क्षति की भरपाई, पर्यावरणीय प्रतिकर तथा भूमि को पूर्व पर्यावरणीय स्थिति में बहाल करने का खर्च जिम्मेदार व्यक्ति से वसूल करने की मांग की जाएगी। NGT के समक्ष प्रस्तावित प्रमुख मांगें आराजी संख्या 2246 एवं संबंधित भूमि का राजस्व एवं वन अभिलेखों के आधार पर संयुक्त सीमांकन कराया जाए।
वन भूमि पर कथित अतिक्रमण एवं निर्माण की स्वतंत्र जांच कराई जाए।वन भूमि पर जारी पट्टे की वैधानिकता की जांच की जाए।संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।
यदि अतिक्रमण/निर्माण अवैध पाया जाए तो उसे हटाकर वन भूमि को पूर्व स्थिति में बहाल कराया जाए। पर्यावरण को हुई क्षति का वैज्ञानिक आकलन कराया जाए।
जांच में कुलदीप शर्मा अथवा किसी अन्य व्यक्ति की पर्यावरणीय क्षति के लिए जिम्मेदारी स्थापित होने पर Polluter Pays Principle के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति एवं पुनर्स्थापना लागत वसूलने का आदेश दिया जाए।
भविष्य में वन भूमि पर इस प्रकार के अतिक्रमण की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक संरक्षणात्मक आदेश जारी किए जाएं।
यह मामला केवल भूमि विवाद का विषय नहीं बल्कि वन भूमि, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई तथा पर्यावरणीय क्षति की पूर्ण भरपाई की मांग NGT के समक्ष की जाएगी।