किसी मन्दिर मे जाकर भगवान को धोग लगाने से पहले अपने माता पिता को प्रणाम अवश्य करें: प्रतिभा श्रीजी

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल|चित्तौड़गढ़ शहर के उपनगरीय क्षेत्र सेन्थी स्थित शांति भवन मे पर्यूषण महापर्व के तृतीय दिवस पर सर्वप्रथम श्री प्रेरणा श्री जी म. सा. ने अन्तगढ़ सूत्र का वाचन किया।जैन सिद्धान्ताचार्य श्री प्रतिभा श्री जी म. सा. ने अपने प्रवचन मे माँ का प्राणी मात्र के प्रति क्या महत्व है इस पर चर्चा की। उन्होंने कहा किसी मन्दिर मे जाकर भगवान को धोग लगाने से पहले अपने घर के जीवित माता पिता को प्रणाम अवश्य करें। माँ ममता का दिव्य मंदिर है, प्रेम का पवित्र शास्त्र है। हर किसी के घर मे माता पिता के रूप मे एक मंदिर व तीर्थ होता है। हर संतान का यह कर्तव्य है कि भगवान को धोग लगाने से पूर्व अपने घर मे जीवित माता पिता का अवश्य ध्यान रखे। माँ ही स्वर्ग का सुकुन है। माँ पृथ्वी स्वरूप होती है व पिता परमात्मा स्वरूप, जो व्यक्ति प्रभातवेला मे श्रद्धापूर्वक अपने माता पिता को प्रणाम करता है वह तीन लोक की परिक्रमा का पुण्य प्राप्त करते है। माँ ममता का मंगल कलश और ममता का महाकाव्य है। माँ की ममता आकाश के अंत और सागर की थाह से अधिक है। ब्रह्मा सृष्टि का सृजन करते है। विष्णु पालन करते है और महादेव हमारा उद्धार करते है। हर माँ यह तीनो कार्य पूरा करती है। अतः माँ अपने आप मे ब्रह्मा विष्णु व महेश है।
पर्युषण महापर्व पर बड़ी संख्या बाहर से अतिथि पधारे जिनका श्रमण संघ सेन्थी द्वारा अभिनन्दन किया गया।