कानपुर में 40 साल से फरार तीन लड़कियों अपहर्ता जूही में गिरफ्तार, मामले से जुड़े अब तक तीन की मौत

सुनील बाजपेई
कानपुर। स्मार्ट हलचल|यहां तीन किशोरियों का अपहरण करने वाले अपराधी को 40 साल बाद गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। कठोर परिश्रम पूर्ण और पूर्ण निष्ठा के साथ की गई पुलिस यह कार्रवाई बताती है कि अपराध की जांच में केवल वर्दी ही नहीं, बल्कि सूझबूझ, धैर्य और जमीनी स्तर पर सुराग जुटाने की क्षमता भी अहम भूमिका निभाती है।जिसके फल स्वरुप अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, पुलिस अगर सुराग तलाशने में पूरी मेहनत और सूझबूझ के साथ जुट जाए तो कानून की पकड़ से उसका बचना मुश्किल हो जाता है।
चर्चा का विषय बनी इस घटना का संबंध जुही थाना क्षेत्र से है ,जहां 1984 में प्रदीप कुमार नामक युवक के खिलाफ तीन किशोरियों को ले जाने के आरोप में अपहरण और विवाह के लिए विवश करने में मुकदमा हुआ था। लोअर कोर्ट ने प्रदीप को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। जिसके बाद उसने वर्ष 1987
हाई कोर्ट में की गई अपील से राहत का फायदा उठाकर फरार हो गया था। हाई कोर्ट ने संज्ञान में लेकर पुलिस आयुक्त से सात अगस्त को जवाब दाखिल करने को कहा था। जिसके बाद ही जूही थाना प्रभारी इंस्पेक्टर केके पटेल की अगुवाई में टीम गठित कर फरार आरोपी प्रदीप की तलाश शुरू हुई। इसके लिए उसके सारे रिश्तेदारों, जमानत दारों, दोस्त, यारों उसके जन्म स्थान से लेकर उन सभी स्थानों तक भी जहां-जहां वह किराएदार आदि के रूप में रहता रहा। इसके लिए जेल जाकर लगभग 40 साल पुराना रिकॉर्ड भी देखा गया। लेकिन सफलता तब भी नहीं मिली। इस बीच गहन छानबीन से यह जरूर पता चल गया कि अपहरण करके ले जाई गई लगभग 39 साल पहले कमसिन भी रही लड़कियों में और जमानत लेने वालों में किसकी किसकी मौत हो चुकी है।
इसके बाद भी योगी सरकार की मंशा के अनुरूप पीड़ितों की सहायता और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही के लिए भी चर्चित निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यशैली वाली कठोर परिश्रमी, तेज तर्रार और जुझारू मिलिट्री कैंप चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर विपिन कुमार, भूपेश राठी, नितिन दुबे और कांस्टेबल अंकित कुमार की इंस्पेक्टर के के पटेल के नेतृत्व वाली टीम ने हार नहीं मानी और चौकी प्रभारी विपिन कुमार ने बड़े धैय के साथ दूरदर्शिता का परिचय देते हुए अपने कठोर परिश्रम की दिशा चुनाव आयोग मतलब मतदाता पहचान पत्र के माध्यम से भी आरोपी का पता लगाने की तरफ मोड़ दी। इसी दौरान कठोर परिश्रम के साथ लगातार जुटे चौकी प्रभारी विपिन यादव की टीम को किसी तरह से आरोपी प्रदीप का वोटर आईडी हासिल हो गया। बस यही से सफलता मिलने का अंतिम चरण आ गया। मतलब जब चुनाव आयोग की वेबसाइट खंगाली गई तो महत्वपूर्ण सफलता के रूप में आरोपी प्रदीप कुमार का एपिक नंबर मिल गया। और जब एपिक नंबर मिल गया तो फिर परिवार का ब्यौरा खंगाला गया। इसी क्रम बीएलओ से संपर्क किया तो एक रिश्तेदार के बारे में जानकारी मिली और जब उस रिश्तेदार से पूछताछ की गई तो लगभग 2 माह से चल रही खोजबीन का समापन करते हुए कर्तव्य के प्रति निष्ठा की परीक्षा का प्रथम श्रेणी का परिणाम लगभग 40 साल से फरार आरोपी प्रदीप कुमार की गिरफ्तारी के रूप में सामने आ गया।