व्हीलचेयर से बूथ तक जज्बा, Gen Z के जोश ने भी बदला सियासी मिजाज

 

आसींद में 80+ बुजुर्गों ने उम्र को दी मात, हमीरगढ़ में दिव्यांग मतदाता ने दिखाई लोकतंत्र की ताकत

 

युवा मतदाताओं में बदलाव की चाहत, 9 निकायों में 77.50 से 87.50 फीसदी तक मतदान; अब ईवीएम में बंद है सियासी फैसला

 

भीलवाड़ा (महेन्द्र नागौरी)

स्मार्ट हलचल।नगर निकाय चुनाव में शुक्रवार को लोकतंत्र की तस्वीर सिर्फ बुजुर्गों के जज्बे तक सीमित नहीं रही। आसींद में 80+ बुजुर्ग व्हीलचेयर के सहारे बूथ तक पहुंचे, हमीरगढ़ में दिव्यांग मतदाता ने शारीरिक चुनौती को मात देकर वोट डाला तो दूसरी ओर Gen Z के युवा मतदाताओं में भी मतदान को लेकर जबरदस्त जोश दिखाई दिया। युवाओं में बदलाव, बेहतर विकास और नई पीढ़ी को राजनीति में अवसर देने की उम्मीद साफ नजर आई।

एक तरफ उम्रदराज मतदाता लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने पहुंचे, तो दूसरी तरफ पहली बार या हाल के वर्षों में मतदान के अधिकार का इस्तेमाल कर रही युवा पीढ़ी ने भी बूथ पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। यानी इस चुनाव में अनुभव, जज्बे और युवा सोच—तीनों एक ही कतार में खड़े दिखाई दिए।

Gen Z का जोश—‘अब शहर की तस्वीर बदलनी चाहिए’

युवा मतदाताओं में मतदान को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। Gen Z का कहना था कि शहरों की राजनीति में नई सोच और नई पीढ़ी को मौका मिलना चाहिए। युवाओं ने सड़क, सफाई, पानी, रोजगार, शिक्षा और आधुनिक नागरिक सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बताया।

यह उत्साह राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ा संकेत है। युवा वोटर अब सिर्फ पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि प्रत्याशी की छवि, स्थानीय काम और भविष्य की उम्मीदों को देखकर फैसला करने का दावा कर रहा है।

आसींद में उम्र हारी, लोकतंत्र जीता

आसींद में 80 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ मतदाता व्हीलचेयर के सहारे मतदान केंद्र पहुंचे और अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह तस्वीर बताती है कि लोकतंत्र में भागीदारी की कोई उम्र सीमा नहीं होती।

उम्र शरीर को थका सकती है, लोकतंत्र के प्रति जज्बे को नहीं।

हमीरगढ़ में दिव्यांग मतदाता ने दिया धारदार संदेश

हमीरगढ़ में दिव्यांग मतदाता ने शारीरिक चुनौती को पीछे छोड़कर मतदान किया। यह तस्वीर चुनाव की सबसे ताकतवर लोकतांत्रिक तस्वीरों में रही।

संदेश साफ था—“शरीर की सीमा हो सकती है, लेकिन मेरे वोट के अधिकार की नहीं।”

जिस मतदाता ने मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए अपनी शारीरिक परेशानी को पीछे छोड़ दिया, उसने सक्षम मतदाताओं के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—जब मुश्किलों के बावजूद वोट दिया जा सकता है, तो मतदान से दूर रहने का बहाना क्या है?

बंपर मतदान ने बढ़ाई सियासी बेचैनी

9 नगरपालिकाओं के अंतिम आंकड़ों ने प्रत्याशियों का गणित उलझा दिया है। जहाजपुर में सर्वाधिक 87.50%, हमीरगढ़ में 86.65%, गंगापुर में 86.60% और मांडलगढ़ में 85.99% मतदान हुआ।

बिजौलिया में 84.68%, आसींद में 83.74%, बनेड़ा में 83.71%, शाहपुरा में 80.43% और गुलाबपुरा में 77.50% मतदान दर्ज हुआ।

अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ा सवाल है—बढ़े हुए मतदान का लाभ किसे मिला?

क्या Gen Z का जोश किसी बदलाव का संकेत है? क्या परंपरागत वोट बैंक पूरी ताकत से बूथ तक पहुंचा? क्या निर्दलीयों ने भाजपा-कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाई?

इन सवालों के जवाब ही परिणाम का असली गणित तय करेंगे।

9 निकायों में मतदान का पूरा आंकड़ा

जहाजपुर: 14,548 — 87.50%

हमीरगढ़: 7,823 — 86.65%

गंगापुर: 12,397 — 86.60%

मांडलगढ़: 9,556 — 85.99%

बिजौलिया: 11,138 — 84.68%

आसींद: 13,960 — 83.74%

बनेड़ा: 7,170 — 83.71%

शाहपुरा: 18,851 — 80.43%

गुलाबपुरा: 16,969 — 77.50%

मशीन रुकी, मतदाता नहीं

हमीरगढ़ में ईवीएम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ समय मतदान प्रभावित हुआ, लेकिन अंतिम मतदान 86.65 फीसदी पहुंचा। साफ है—ईवीएम कुछ देर रुकी, लेकिन मतदाताओं का उत्साह नहीं रुका।

गुलाबपुरा के वार्ड नंबर 8 में कथित फर्जी वोटिंग को लेकर हंगामा भी हुआ, जिससे चुनावी माहौल में राजनीतिक गर्मी बढ़ी।

अब ईवीएम खोलेगी सियासी राज

जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने मतदान को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित बताते हुए निर्वाचन दलों, अधिकारियों और कार्मिकों के प्रयासों की सराहना की।

अब मतदान पूरा हो चुका है। बुजुर्गों का जज्बा, दिव्यांग मतदाता की दृढ़ता और Gen Z का जोश—तीनों ने अपना फैसला ईवीएम में दर्ज कर दिया है।

अब देखना यह है कि—

युवा जोश किसके पक्ष में गया?

परंपरागत वोट बैंक किसके साथ खड़ा रहा?

निर्दलीयों ने किसका गणित बिगाड़ा?

और बंपर मतदान किस पार्टी के लिए सत्ता की सीढ़ी बना?

मतदाता ने वोट डाल दिया है… अब ईवीएम खोलेगी 9 नगरपालिकाओं का सियासी राज।